बच्चों के लिए बंद होगा सोशल मीडिया,आंध्र प्रदेश में 13 और कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र पर पाबंदी

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दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक फैसला किया है।

डिजिटल लत और बच्चों के व्यवहार पर पड़ रहे नकारात्मक असर को देखते हुए दक्षिण भारतीय राज्यों ने सख्त कदम उठाए हैं। 6 मार्च 2026 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपनी-अपनी विधानसभाओं में इन प्रतिबंधों का ऐलान किया।

आंध्र प्रदेश: 13 साल से कम उम्र पर बैन, 90 दिन में होगा लागू

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में घोषणा की कि आंध्र प्रदेश में 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।

विराट कार्यक्रम: सरकार अगले 90 दिनों के भीतर एक विशेष अभियान शुरू करेगी ताकि बच्चों की पहुंच इन प्लेटफॉर्म्स से हटाई जा सके।

अगला कदम: आईटी मंत्री नारा लोकेश के प्रस्ताव पर विचार करते हुए सरकार 13 से 16 साल के किशोरों के लिए भी विशेष दिशा-निर्देशों पर मंथन कर रही है।

लक्ष्य: सीएम नायडू ने कहा, “तकनीक का दुरुपयोग हथियार बन सकता है, हमें अपने बच्चों को डिजिटल लत से बचाना होगा।”

कर्नाटक: बजट सत्र में 16 साल से कम उम्र पर पाबंदी का ऐलान

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।

बजट का हिस्सा: ‘स्कूल शिक्षा’ अनुभाग के तहत इस प्रस्ताव को रखा गया है। सरकार का उद्देश्य बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और शैक्षणिक गिरावट को रोकना है।

“मोबाइल छोड़ो, पुस्तक पकड़ो”: राज्य में पहले से ही मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए “मोबाइल बिड़ी, पुस्तक हिड़ी” अभियान चलाया जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय: यह फैसला वाइस-चांसलरों और बाल विशेषज्ञों के साथ लंबी चर्चा के बाद लिया गया है, जिन्होंने मोबाइल फोन को अपराधों और मानसिक तनाव से जोड़ा था।

क्यों जरूरी हुई यह पाबंदी? (Key Reasons)

दोनों राज्यों की सरकारों ने इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण बताए हैं:

मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health): सोशल मीडिया से होने वाला तनाव, साइबर बुलिंग और तुलनात्मक व्यवहार बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डाल रहे हैं।

सीखने की क्षमता: अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों का ध्यान (Attention Span) कम हो रहा है और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

ऑनलाइन सुरक्षा: कम उम्र के बच्चे अक्सर हानिकारक कंटेंट और ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।

ऑस्ट्रेलिया के मॉडल पर आधारित

आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्पष्ट किया कि भारत के ये राज्य ऑस्ट्रेलिया के ‘अंडर-16’ कानून का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। सरकार जल्द ही एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करेगी ताकि सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का सख्ती से पालन करें।

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