सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते’ (SMDA) पर हस्ताक्षर किए थे। इस ‘नाटो-स्टाइल’ संधि के तहत किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाना था। लेकिन जब ईरान ने सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों (जैसे रास तनुरा) को निशाना बनाया, तो पाकिस्तान ने मदद भेजने के बजाय ‘राजनयिक संतुलन’ का रास्ता चुन लिया है।
1. क्या था वह समझौता जिसे पाकिस्तान ने तोड़ा? (The Broken Pact)
SMDA 2025: सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाक पीएम शहबाज शरीफ के बीच हुई इस डील में स्पष्ट था कि यदि कोई तीसरा देश (जैसे भारत या ईरान) हमला करता है, तो दोनों सेनाएं मिलकर मुकाबला करेंगी।
भारत को घेरने की रणनीति: विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान ने यह डील मुख्य रूप से भारत को कूटनीतिक रूप से दबाने के लिए की थी, ताकि भविष्य में भारत के साथ युद्ध की स्थिति में सऊदी अरब का साथ मिल सके।
2. ईरान की ‘चेतावनी’ और पाकिस्तान का डर
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने स्वीकार किया है कि वे मुश्किल स्थिति में हैं:
ईरान का दबाव: ईरान ने पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब की धरती (जहाँ अमेरिकी बेस भी हैं) का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हुआ और पाकिस्तान ने समर्थन दिया, तो परिणाम गंभीर होंगे।
आंतरिक कलह का डर: पाकिस्तान में लगभग 4 करोड़ शिया आबादी है जो ईरान के प्रति सहानुभूति रखती है। ऐसे में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के भीतर ‘गृहयुद्ध’ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
3. सऊदी अरब को दिया ‘भरोसे’ का झुनझुना
हमलों के बाद पाकिस्तान ने केवल ‘जुबानी एकजुटता’ (Solidarity) दिखाई है:
शटल डिप्लोमेसी: इशाक डार ने बताया कि उन्होंने ईरान और सऊदी अरब के बीच ‘मध्यस्थ’ बनने की कोशिश की है, ताकि सऊदी पर हमले कम हों।
मैदान छोड़कर भागना: जमीनी हकीकत यह है कि पाक वायुसेना या थल सेना का कोई भी दस्ता सऊदी की सुरक्षा के लिए तैनात नहीं किया गया है, जबकि समझौते के तहत यह अनिवार्य था।
4. विशेषज्ञों की राय: अपने ही बुने जाल में फंसा पाक
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान अब ‘दो मोर्चों’ पर फंस गया है:
एक तरफ अफगानिस्तान के साथ सीमा पर युद्ध जारी है।
दूसरी तरफ सऊदी अरब को सैन्य मदद न देकर वह अपने सबसे बड़े ‘आर्थिक मददगार’ (Riyadh) को नाराज कर रहा है।
5. भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
भारत इस स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच दरार भारत के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इससे पाकिस्तान का वह भ्रम टूट जाएगा कि अरब देश हर स्थिति में उसके सैन्य सहयोगी बनेंगे।
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