शांति निकेतन ऐकडमी में अबीर – गुलाल लगाकर छात्र – छात्राओं ने मनाई होली।

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गया जी।शांति निकेतन एकेडमी की सभी शाखाओं में को होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया है।
इस अवसर पर विद्यालय के छात्र – छात्राओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली मनाई है। वि‌द्यालय के प्रांगण में रंगोली बनाई गई और होलिका भी तैयार किया गया क्‍लास  प्‍ले ग्रुप से शिवांस राज, शिवा मौर्या, रुद्रांश  ने गुब्बारे में रंग भरकर पेंटिग किया है। नर्सरी से ओसु, मिशीका, श्रीहरि ने प्रिटिंग में थम्‍ब प्रिटिंग किया है।  ओम शंकर, शोभित, नित्या ने पिचकारी में रंग भरकर कलर किया है। जुनियर केजी से  मेहुल सिन्हा, महद, मानसी, कृतिका ने रंगों से रंगोली मनाई। सीनियर के०जी० से छात्र इशव,  हर्शित, सार्थक,अयान, सानवी, अर्थव ने रंगों से फुल बनाकर रंग भरे। शिक्षिका सिमरण मैम, हबिबा मैम, निशा, अनु मैम, रौशनी मैम ने पुतले के माध्यम से भक्त प्रहलाद की लोकप्रिय कथा सुनाई और यह बताया की भक्त प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप स्वयं विष्णु भगवान को नहीं मानते थे लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु के भक्त थे। उन्होंने प्रहलाद को विष्णु की भक्ति करने से रोका जब वह नहीं माने तो इससे नाराज होकर उनके पिता ने प्रहलाद को आग से जलाकर कर मारने की योजना बनाई है। उसने अपनी बहन होलिका से कहा की वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठे क्योंकि होलिका को भगवान से ये वरदान मिला था की आग उसे जला नहीं सकता है । अपने भाई की बात मान होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठी परन्तु प्रहलाद को इस आग से कोई नुकसान नहीं हुआ बल्कि होलिका ही इस आग में जलाकर ख़ाक हो गई। यह कथा इस बात का संकेत है कि बुराई पर अच्छाई की जीत हमेशा होती है। और साथ-ही-साथ सीनियर के०जी० की छात्रा ने मिलकर होली के गीत गाए हैं।
इस अवसर विद्यालय के चेयरमैन  हरि प्रपन्न ने सभी छात्र-छात्राओं एवं विद्यालय परिवार को होली की शुभकामनाएँ दी एवं बच्चों को पानी की बर्बादी एवं हानिकारक रंगों का प्रयोग न करने की सलाह दी है।  प्रपन्न ने यह भी कहा की होली रंगों का त्योहार है और इसे सभी धर्म के लोगों को उत्साह एवं उमंग से आपसी भाईचारे के साथ मनाना चाहिए।
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