मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) : जिला मुख्यालय मोतिहारी स्थित एक होटल में शनिवार को “इमरजेंसी तैयारी योजना (Emergency Preparedness Plan) एवं एंटीसिपेटरी एक्शन” विषय पर जिला स्तरीय कैपेसिटी बिल्डिंग एवं कंसल्टेशन कार्यक्रम का आयोजन सेल्स फोर्स के सहयोग से जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार, बाल रक्षा भारत तथा बिहार इंटर एजेंसी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से बढ़ती आपदाओं के जोखिम को कम करते हुए जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट रेजिलिएंट) समुदाय का निर्माण करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, डीसीएम नंदन झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी राहुल कुमार, बिहार इंटर एजेंसी ग्रुप के संयोजक अमर, रिसोर्स पर्सन प्रवीण कुमार, महिला विकास निगम के डीपीएम वीरेंद्र कुमार एवं निर्देश की प्रतिनिधि मधु कुमारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
विषय प्रवेश कराते हुए बिहार इंटर एजेंसी के को-फाउंडर एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ प्रवीण कुमार ने आपदाओं के प्रकार, उनके प्रभाव तथा जोखिम न्यूनीकरण की रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एंटीसिपेटरी एक्शन का मूल सिद्धांत है — “आपदा आने से पहले तैयारी”, जिससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने समुदाय आधारित तैयारी, पूर्व चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित आश्रय स्थल, आवश्यक संसाधनों की पूर्व व्यवस्था तथा प्रशिक्षण को आपदा प्रबंधन की प्रभावी कड़ी बताया।
सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी अखिलेश कुमार ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल प्रशासन का नहीं बल्कि बहु-विभागीय समन्वय का विषय है। जनप्रतिनिधियों, अंचल कार्यालय, फायर विभाग एवं अन्य लाइन विभागों के साथ तालमेल बनाकर ही प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य संभव है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा प्रशिक्षित “आपदा मित्र” आपदा के समय समुदाय के साथ खड़े रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा भविष्य में भी सभी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किया जाएगा।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि संभावित आपदाओं को देखते हुए पूर्व योजना मार्च माह से ही तैयार कर ली जाती है ताकि आपदा के समय त्वरित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को आपदा प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
जिला कम्युनिटी मोबिलाइज़र नंदन झा ने कोविड-19 काल का उल्लेख करते हुए कहा कि बनकटवा प्रखंड को मॉडल के रूप में विकसित किया गया था, जो अग्रिम तैयारी (एंटीसिपेटरी एक्शन) का सफल उदाहरण है।
महिला विकास निगम के डीपीएम वीरेंद्र कुमार ने आपदा के दौरान महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा तथा उनकी सहभागिता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन असीम कुमार मंडल ने किया। इस अवसर पर बालरक्षा भारत के हामिद रज़ा,सत्य प्रकाश, शिक्षा विभाग के शकील अहमद, जल संसाधन विभाग के विकास कुमार, बाल कल्याण समिति दिग्विजय कुमार, विजय कुमार उपाध्याय, मुखिया मोहन सहनी, सरपंच मुरारी सहनी, पंचायत समिति सदस्य राजेश सहनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठनों सी-3 के आदित्य राज, पिरामल फाउंडेशन के अरबिंद सिंह, डंकन हॉस्पिटल के समीर दिग्गल सहित अन्य सदस्यों ने अपने विचार रखे ।
कार्यशाला के अंत में समूह चर्चा के माध्यम से जिला स्तरीय इमरजेंसी प्रिपेयर्डनेस प्लान (EPP) एवं एंटीसिपेटरी एक्शन प्रोटोकॉल का प्रारूप तैयार किया गया, जिसे भविष्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं त्वरित राहत कार्यों के लिए लागू करने पर सहमति बनी।
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