-खुद को तराशने की बजाए स्वामी ने स्वंय को संगीत के मार्गी पथ की ओर अग्रसारित किया : डाॅ. नीतू कुमारी नूतन
मोतिहारी। अशोक वर्मा बनारस के पंडित मार्कण्डेय मिश्र घराने की पीढ़ी के मजबूत स्तंभ शास्त्रीय गायक संगीताचार्य स्वामी आत्माराम मिश्र के आकस्मिक निधन से चंपारण के कला- संस्कृति जगत मे गहरी मायूसी छा गयी है।
रविवार को प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नाथ पाण्डेय मेमोरियल ट्रस्ट, मोतिहारी के तत्त्वावधान मे शहर के बलुआ टाल स्थित ट्रस्ट कार्यालय परिसर में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई, जहाँ बुद्धिजीवी एवं कलाकर्मियो ने स्वामी आत्माराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी कला- यात्रा को नमन किया तथा उनके प्रति अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
पंडित मार्कण्डेय मिश्र की अग्रणी शिष्या व अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध लोक गायिका डाॅ. नीतू कुमारी नूतन ने अपने उद्गार प्रेषित कर कहा है कि स्वामी आत्माराम मिश्र ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहन शिक्षा ग्रहण करने व कठिन साधना के बावजूद खुद को तराशने की बजाए बनारस घराने की शैली को आगे बढ़ाने की नीयत से स्वंय को संगीत के मार्गी पथ की ओर अग्रसारित किया।
डाॅ.नूतन ने कहा कि आज के इस व्यावसायिक दौर मे भी स्वामी आत्मा राम ने गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित करने का साहस कर अनेक शिष्य – शिष्याओ को बनारस घराने की गहरी तालीम दी तथा उन्हें शास्त्रीय राग- रस मे पारंगत किया। एम. एस. काॅलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि स्वामी आत्माराम पंडित मार्कण्डेय मिश्र के एक ऐसे योग्य पुत्र और सुयोग्य शिष्य थे, जिन्होंने पिता व गुरु के अवसान के पश्चात अपने घराने की विशेषताओं एवं शैली को एक नयी पहचान दिलाई है।
उन्होंने कहा कि स्वामी आत्माराम मिश्र एक ऐसे शास्त्रीय गायक थे, जिन्होंने चंपारण के धराधाम को अपने राग- रंग से दशको तक गुलजार किया। प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डाॅ. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि स्वामी के अवसान से बनारस घराने के शास्त्रीय संगीत का एक मजबूत किला ढह गया है, जिसकी भरपायी आने वाले दिनो मे असंभव है।
डाॅ. राजेश ने कहा कि उनका निधन चंपारण की कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईस्ट चंपारण लायंस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह ने कहा कि स्वामी आत्माराम ने न सिर्फ शास्त्रीय रागो को आत्मसात किया था, बल्कि अपनी सादगी एवं मृदुभाषी व्यवहार से कलाप्रेमियो के दिलो पर एक गहरी व अमित छाप भी छोड़ी है।
उन्होंने कहा कि स्वामी आत्माराम गुरुवर मार्कण्डेय मिश्र की पीढ़ी के अगले संस्करण थे, जिनके अकस्मात जाने से यह कड़ी टूट-सी गई है। एल. एन. डी. काॅलेज के शिक्षा शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. कृष्ण कुमार सिन्हा उर्फ राजू कृष्ण ने कहा कि स्वामी आत्माराम के संपूर्ण व्यक्तित्व पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहरी छाप थी एवं उन्होंने उसी दृष्टिकोण से अपना जीवन पद्धति अपनाया था।
प्रो. ( डाॅ.) वीरेन्द्र नाथ पाण्डेय मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव संजय पाण्डेय ने स्वामी आत्माराम के व्यक्तित्व की बारीकियो को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके जीवन पर भारतीय शास्त्रीय संगीत का गहरा प्रभाव था। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्माराम का जीवन, कलात्मक योगदान व उपलब्धियाँ नयी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्पद हैं।
मौके पर शारदा संगीतालय की प्राचार्य संगीता कुमारी, प्रो. दिवाकर नारायण पाठक, किरण पाण्डेय, युवा फिल्मकार ऋतिक विराज पाण्डेय, अनुराग मिश्र सहित कई कलाकर्मी व गणमान्य लोग मौजूद थे।
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