एक दवा दुकानदार हनुमान भक्त केदार सिंह का दृढ़ संकल्प ने रंग लाया, मीनाबाजार में तीन मंजिला मंदिर बनकर तैयार हुआ

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आरंभ में 50 कलश स्थापित हुआ था आज 201 कलश है स्थापित 
अशोक वर्मा
 मोतिहारी  : नगर के मीना बाजार में एक बहुत ही छोटा मंदिर था जहां घूमंतु साधु बैठकर गांजा पीते थे लेकिन इस मंदिर पर एक ऐसे धर्म परायण व्यक्ति की नजर पड़ी जो देखे देखते देखते उस मंदिर का कायाकल्प कर दिया। केदार प्रसाद नामक दवा विक्रेता की  दुर्घटना होती है और उन्हे नया जीवन मिलता है।उन्होने शेष जीवन को ईश्वरीय सेवा में लगाने का निर्णय लिया । दुकान के पास मीना बाजार के उस छोटे मंदिर का कायाकल्प करने का उन्होने संकल्प लिया ।51 हजार रुपया उन्होंने दान दिया और मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ हुआ। काफी लोग आगे आए और आज  मंदिर तीन मंजिला बनकर तैयार है।मंदिर की भव्यता देखने लायक है। आरंभ में वहां 50 लोगों ने कलश रखा था लेकिन इस वर्ष 2001  कलश स्थापित  है जो अपने आप में भक्ति के बढते प्रभाव का एक उदाहरण  है।  उन्होंने भक्ति एक नया माहौल बनाया जिसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। मंदिर तीन मंजिला है और भक्ति एवं सेवा का एक अनूठा स्थल बन चुका है। मंदिर के प्रथम मंजिल पर  मंदिर कमेटी ने शहर में आने वाले ऐसे परीक्षार्थियों के लिए  जगह आरक्षित कर रखी है जो दूर दराज से आते हैं। साथ-साथ कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसका शहर मे कही ठौर नही है उसके लिए भी मुफ्त मे ठहरने की व्यवस्था की गई है। स्वेच्छा से कोई दान पेटी में देना चाहे तो दे भी सकता है, लेकिन कोई शुल्क तय नहीं की गई है।मंदिर जब बड़े स्वरूप में बन गई तो सड़क ट्राफिक और पार्किग की एक बहुत बड़ी समस्या थी क्योंकि वहां पर गाड़ी लगाने की  व्यवस्था नहीं थी ,8 फीट की सड़क वह भी बाजार के अंदर थी लेकिन प्रशासन के सहयोग से मंदिर के ठीक सामने की सरकारी दुकाने  हटायी गयी और आज मंदिर सीधे मेंन रोड से जुड़ गया है जिसके कारण काफी लोग वहां आ रहे हैं ।उस मंदिर को मनोकामना  सिद्ध पीठ भी कहा जा रहा है क्योंकि बहुत लोगों ने  बताया कि दिल से यहां जो भी मुरादे मांगी जाती है वह पूरी होती है। भगवान का आशीर्वाद यहां मिलता है। स्वयं केदार प्रसाद ने हीं बताया की पहले  तो मेरी ही मुराद  पूरी हुई  है ।कल तक मेरी एक छोटी सी दवा की दुकान थी आज होटल है कई दुकाने हैं मेरी आर्थिक संपन्नता सुदृढ हुई  है। जब तक मेरे शरीर में सांस है मैं माता की सेवा करता रहूंगा।  माता ने हीं मुझे नया जीवन दिया है। मंदिर परिसर में कई महिलाएं माताएं बच्चिया मिली ।सभी ने कहा कि हम लोगों की मुरादे यहां आने से पूरी होती है इसलिए हम लोग यहां पर अक्सर आते रहते हैं यह जगह सिद्ध जगह होता जा रहा है।
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