- 19 प्रांतो की हुई भागीदारी
- कनाडा मे स्वतंत्रता सेनानी परिवार के 11वीं पीढी के दरवाजे पर सरकार पहूंचा रही है सभी सुख सुविधा : जीतेन्द्र रघुवंशी
- देशभर मे लागु हो स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी पेंशन– अध्यक्ष देशबंधु
- स्वतंत्रता सेनानी परिवार की मांग जायज प्रधानमंत्री तक में उनके संदेश को पहुंचाउगा –नरेश बंसल राज्य सभा सांसद
अशोक वर्मा
दिल्ली : राजधानी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भारतीय किसान संघ के कार्यालय मे आयोजित दो दिवसीय (14-15 सितंबर)स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के केंद्रीय कार्य कारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में देश के 19 राज्यो के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया एवं गहन विचार विमर्श के बाद सर्वसम्मत से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवारों की इसी तरह उपेक्षा की गई तो हमें मजबूर होकर आजादी के महानायकों राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद तथा भगत सिंह जैसे महामानवो का अनुसरण करते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों के सम्मान तथा उनके उत्तराधिकारियों के अस्तित्व की रक्षा के लिए क्रान्ति का बिगुल बजाना होगा। बैठक में स्वतंत्रता सेनानी परिवार से सम्बद्ध राज्यसभा सांसद माननीय नरेश बंसल भी पहुंचे राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने उन्हें अपने प्रस्तावना माग पत्र पत्र भेंट किया और आग्रह किया कि इसे प्रधानमंत्री जी तक पहुंचा कर राष्ट्र धर्म का निर्वहन करें, श्री बंसल ने आश्वासन दिया कि आपका संदेश सरकार तक पहुंचाकर यथाशीघ्र प्रपत्र पर दिए गए बिंदुओं पर चर्चा करके माननीय प्रधानमंत्री द्वारा आजादी के शताब्दी समारोह तक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों का भारत बनाएंगे,प्रधान मंत्री द्वारा की गई घोषणा को धरातल पर उतारने में स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की जाएगी। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री तक स्वतंत्रता सेनानी परिवारों की आवाज पहुंचाकर अपने आप को मै गौरवान्वित अनुभव करूँगा। संबोधन के दौरान राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने कहा कि मैं दो माह के लिए कनाडा सिर्फ इस विषय पर अनुभव प्राप्त करने के लिए गया था कि वहां के स्वतंत्रता सेनानी परिवार को सरकार क्या सुविधा दे रही है। उन्होंने कहा कि मैं हतप्रभ रह गया जब यह जानकारी मिली कि 150 वर्ष की आजादी के बाद कनाडा में 11वीं पीढ़ी के स्वतंत्रता सेनानी परिवार को तमाम सुख सुविधा उनके दरवाजे पर सरकार पहुंचा रही है मानो वहां के वे देवी देवता परिवार के लोग हैं ।सभी तरह की सरकारी सुविधा, आर्थिक पक्ष ,मेडिकल संबंधित सुविधा उन्हे मिल रही है।इसके अलावा किसी भी कार्यालय में जाने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मान सम्मान देते हुए उनके कार्यों का निपटारा किया जाता है,टेक्स माफी आदि आदि देखकर सभी सुविधा दी जा रही है। मुझे आश्चर्य हुआ कि धरती पर किसी देश मे ऐसा भी हो रहा है ?श्री रघुवंशी ने कहा कि आज भारत में स्वतंत्रता सेनानी परिवार के दूसरी पीढ़ी तक को उत्तराधिकारी माना गया है वह भी सिर्फ कागज पर ,उन्हे किसी तरह की सुख सुविधा मुहैया नहीं करायी गई है। देश के अंदर चंद प्रदेशों में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी पेंशन लागू किया गया है लेकिन देश के अभी अन्य प्रांत के सेनानी उतराधिकारियो को किसी तरह की सुविधा नही मिल रही है ।उन्होंने कहा कि जब इंदिरा गांधी विदेश यात्रा पर गई थी तो वहां भारत के सेनानियों के मूर्ति पर माल्यार्पण करते वक्त वहां के लोगों ने कहा कि हम लोग भारत के सेनानियों का बहुत इज्जत करते हैं, उस समय इंदिरा गांधी को ग्लानि हुई कि हम लोगों ने तो अपने देश में कुछ भी नहीं किया और वहां से आने के बाद उन्होंने 1972 में ₹200 का स्वतंत्रता सेनानी पेंशन लागू किया और सेनानियों को ताम्रपत्र भी दिया। अभी देश में गिने-चुने स्वतंत्रता सेनानी जीवित बचे हैं ।सेनानी की मृत्यु या उनके आश्रित पति पत्नी की मृत्यु के बाद वह पेंशन बंद हो जा रहा है, जबकि प्रीवि पर्स राशि से स्वतंत्रता सेनानी पेंशन दिया जाता रहा है, आज वह राशि बची पडी रह जा रही है ।राष्ट्रीय स्तर पर पेंशन ही नहीं बल्कि किसी तरह की कोई सुविधा सेनानी परिवार को अभी नहीं दी जा रही है, जो देश के लिए शर्म की बात है। सेनानी परिवार की दूसरी पीढ़ी तक को ही सरकार उत्तराधिकारी मान रही है यह भी एक विसंगति है। पूर्व राज्यसभा सांसद श्री महेश जी ने संविधान निर्माण प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला कहा समय मांग कर रहा है की जो भी अतीत काल में त्रुटि हुई है उसमें सुधार किया जाए उन्होंने बड़े ही आध्यात्मिक के भावना से अपनी बातों को रखा और कहा कि स्वतंत्रता सेनानी परिवार को जितने भी सुविधा दी जाए वह काम ही होगी क्योंकि देश पर पहला हक इस परिवार का ही बनता है। कार्यक्रम में सभी प्रांत से पधारे अध्यक्ष , महासचिव या वरिष्ठ अधिकारियो ने अपने अपने विचार व्यक्त किये और अपने-अपने प्रदेश में जो कुछ भी कार्य संपन्न हुआ है उस पर विस्तार से प्रकाश डाला ।पंजाब से आए प्रतिनिधि ने कहा कि पंजाब के हर जिले में स्वतंत्रता सेनानी उतराधिकारी गृह बन चुका है जहां स्वतंत्रता सेनानी परिवार के लिए सभी तरह की सुख सुविधा का प्रबंध किया गया ।उन्होंने कहा कि सभी प्रखंड कार्यालय में सेनानियों का नाम शिलापट्ट पर अंकित है ।पंजाब मे हम लोग सेनानी परिवार के मान सम्मान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। बिहार से पधारे प्रदेश महासचिव अशोक वर्मा ने कहा कि जिस तरह चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी ने किसानो की समस्या को सूचीबद्ध कर प्रशासन को सौपा और उन्हें राहत दिलाई थी ,हम लोग भी सेनानी परिवार का सर्वे कर उन्हे सभी सरकारी सुविधा दिलायेगे। प्रत्येक मांह के प्रथम रविवार को होने वाले सेनानी और शहीदो को समर्पित कार्यक्रम अब एक क्रांतिकारी स्वरूप लेता जा रहा है। सभी मे उत्साह भी काफी देखा जा रहा है । शहीद एवं सेनानी को याद करो मासिक कार्यक्रम संपन्न होने के बाद उक्त क्षेत्र के कम से कम दो सेनानी परिवार से मिलकर उनके आर्थिक स्थिति का हमलोग सर्वे कर जरूरत पड़ने पर उन्हे आर्थिक या मेडिकल सहयोग भी कर रहे है। संबोधित करने वालों में तमिलनाडु के अध्यक्ष देशबंधु जी, उत्तर प्रदेश के राजेश सिंह, हरिद्वार के अनुराग सिंह ,अमेठी के अशोक कुमार द्विवेदी, आमोद प्रताप सिंह जो जीवित सेनानी भैया बहादुर सिंह के पुत्र हैं, प्रकाश माझी, श्री नंदकिशोर कुशीनगर के अवधेश सिंह, कर्नाटक से पधारी एक माताजी के अलावा सभी प्रदेशों से पधारे प्रतिनिधियों ने अपना अनुभव सुनाया और भविष्य के कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। उक्त अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग बलिदान की गाथा नामक पुस्तक का विमोचन अतिथि गणो द्वारा किया गया । बैठक मे सेनानी संगठनो का एक समन्वयन समिति बनाने का निर्णय किया गया जिसके लिए तीन सदस्यीय कमिटी बनाई गई। सांगठनिक एवं वैचारिक सत्र समाप्त होने के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता मे राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव में माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा आजादी के शताब्दी समारोह तक “स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों का भारत बनाएंगे” की घोषणा की गई थी, बाद में भी विभिन्न मंचों से माननीय प्रधानमंत्री जी ने इस संकल्प को दोहराया, किन्तु स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपने क्या थे, यह जानकारी सरकार को कहां से मिलेगी? यह तो उनके वंशज ही बता पाएंगे, जिनसे सरकार ने अत्यधिक दूरी बना रखी है।
इस दौरान रघुवंशी पत्रकार वार्ता में बताया कि हमने अमृत महोत्सव वर्ष में सरकार से दिल्ली में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेमोरियल की स्थापना करने, भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की एमिनेंट कमेटी में सेनानी परिवारों के हितों की रक्षा के लिए संघर्षरत संगठनों के प्रतिनिधियों को मनोनीत करने, संवैधानिक संस्थाओं राज्यसभा, विधान परिषद, केन्द्रीय समितियों तथा नगर निकायों में सेनानी परिवारों को मनोनीत करने, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार कल्याण परिषद का गठन करने, स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को विशेष पहचान देकर ऑनलाइन परिचय पत्र प्रदान करने, स्वतंत्रता सेनानी के निधन के बाद उनकी सम्मान पेंशन की धनराशि तथा सुविधा सेनानी परिवारों को हस्तांतरित करके जरूरतमंद सेनानी परिवारों को वित्तीय सहायता का प्रावधान करने, पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों शहीदों की जीवनी को शामिल किए जाने, स्वतंत्रता सेनानी की मान्यता देने वाले 1980 की नियमावली में संशोधन करके केन्द्र तथा राज्य सरकारों के स्वतंत्रता सेनानियों की असमानता की खाई पाटने तथा दिल्ली में स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के लिए सेवा सदन बनाने का आग्रह किया था, किन्तु आज हमें अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि प्रधानमंत्री को 4 अगस्त 2022 तथा 4 अक्टूबर 2022 को भी स्मरण पत्र भेजने के बावजूद सरकार द्वारा कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया, इससे देश भर के लगभग चार करोड़ स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के उत्तराधिकारियों में बेहद नाराजगी और आक्रोश उत्पन्न हो रहा है आखिर कब तक अपमान सहेंगे स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवार?
वहीं इस पत्रकार वार्ता में संगठन के अध्यक्ष देशबंधु ने कहा कि हम अपने पूर्वजों के सपनों को साकार करने में सरकार के सहयोगी के रूप में भूमिका निभाना चाहते हैं किन्तु सरकार की उपेक्षा से इतना विशाल परिवार मर्माहत है, फिर भी हम सेनानी परिवारों से निवेदन करते हैं कि हमें भ्रमित नहीं होना चाहिए। स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवारों के हितों की रक्षा करने में सहयोगी की भूमिका निभाने वाले जनप्रतिनिधियों को ही अपना समर्थन देकर विधानसभाओं तथा संसद तक पहुंचना चाहिए। यह संगठन गैर राजनीतिक है, परन्तु स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों को पूरा करने वाली सरकारों को ही मजबूत करना होगा। श्री सुरेश चन्द्र सुयाल ने सेनानी परिवारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि माँ गंगा के प्रवाह के साथ हरिद्वार से निकली सेनानी परिवारों की गूँज पूरे देश के सेनानी परिवारों को सम्मान दिलाएगी।
प्रेस वार्ता को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार, संगठन सचिव कपूर सिंह दलाल, सुरेश चंद्र सुयाल, छत्तीसगढ़ के मुरली मनोहर खंडेलवाल, चंद्रप्रकाश बाजपेई, उत्तरप्रदेश के मृगांक शेखर आनंद, रमेश कुमार मिश्रा, राजस्थान के विशाल सिंह सौदा, पंजाब के परमजीत सिंह टिवाना, ज्ञान सिंह सग्गू, मध्यप्रदेश के डॉ. राजा भैया मिश्रा, कमल अग्रवाल, सुनील गुजराती, बिहार के अशोक कुमार वर्मा, झारखंड के ओमप्रकाश मांझी, दिल्ली के विजय कुमार तोमर, हरियाणा के भगवान फोगाट, महाराष्ट्र के सचिन कुमार, तमिलनाडु के सुंदर विमलनाथन, कर्नाटक के सिंगू रमेश तथा ने भी संबोधित किया।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के विभिन्न प्रान्तों से राजेश प्रताप सिंह, महंथ प्रजापति, सूर्य प्रकाश पांडे, सुरेश चंद्र बबेले, भगवत शरण पश्तोर, ज्ञान सिंह सग्गू, शिवयोगैया, बिजेन्द्र भादू, अरुण प्रताप सिंह, रवि दत्त राय, मदन मोहन राय, अनुराग सिंह गौतम, आदित्य गहलोत, अवधेश सिंह, वीरांगना चन्नाबेसम्मा तथा अलका चौहान आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दूसरे दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन को सादगी पूर्ण एक संकल्प के साथ मनाया गया जिसमें नए भारत के निर्माण एवं देश में मूल्यों को पुनर्स्थापित करने हेतु स्वतंत्रता सेनानी परिवार तन मन धन से अपनी सेवा देगा का संकल्प दोहराया गया।
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