अशोक वर्मा
मोतिहारी : कहा जाता है कि बुढ़ापा में पति पत्नी का साथ या स्मृति ही शेष जीवन का आधार होता है ।वक्त के साथ धीरे -धीरे सभी रिश्ते दूरी मे बदल जाते है लेकिन बुढापे मे पति पत्नी के रिश्ते और प्रगाढ हो जाता है।बेटेऔर बेटियो की अपनी गृहस्थी उसकी मजबूरी भी हो जाती है,लेकिन पति पत्नी का रिश्ता अटूट और अधिक प्रगाढ हो जाता है।लेकिन बुढापे मे किसी एक का साथ छूटना जीवन मे सबसे कष्ट कारक होता है।बुढापे का शेष जीवन याद और समृतियो के सहारे जीने की विवशता होती है। 82 वर्षीय ई हरिशंकर चौधरी की पत्नी मैना देवी की मृत्यु 10 अगस्त 2007 मे हुई थी।तीन बेटी एवं दो बेटे के पिता हरिशंकर चौधरी के जीवन मे अचानक सूनापन आ गया।तीनो बेटी और दोनो बेटो की शादी होने से सबकी अपनी गृहस्थी हो गई थी।चौधरी जी का जीवन बिलकुल एकांकी हो गया था।पत्नी के फोटो के पास घंटो बैठे रहते थे।इस वर्ष 18 वी पुण्य स्मृति पर उन्होने अपने पुस्तैनी गांव अजगरी मे दिवंगत पत्नी की याद मे एक स्मारक का निर्माण किया।10 अगस्त स्मृति दिवस पर उसका विधिवत पूजा अर्चना कर घंटो वहा खडे रहे।बडा ही भावुक और मार्मिक दृश्य था।उस मौके पर उनके बच्चे भी मां की याद मे खो गये थे,सभी स्मारक पर बडे ही श्रद्धा के साथ पुष्प अर्पण किये।।
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