क्लबफुट के बच्चों के इलाज में आरबीएसके की पहल: “आरबीएसके” के सहयोग से “क्लबफुट” के बच्चों का पटना में हो रहा है निःशुल्क ईलाज

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  • क्लब फुट एक जन्मजात विकार है, जिसमें बच्चे के पैर या पैर के टखने का आकार असमान्य होती है – सिविल सर्जन 
  • आंगनबाडी केंद्रों, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ऐसे बच्चे की होती है खोज 
  • 8 बच्चों क़ो भेजा गया पटना, 04 बच्चों का हो रहा है फॉलोअप 
बेतिया : बच्चों के जन्मजात विकारों में क्लब फुट एक ऐसा रोग है जिसमें बच्चे के पैर या पैर के टखने का आकार या स्थिति सामान्य से अलग होती है। इसे चिकित्सकीय भाषा में “कंजेनाइटल टेलिप्स इक्विनोवेरस ” कहा जाता है। इस स्थिति में पैर अंदर की ओर मुड़ जाता है, जिससे बच्चा सामान्य रूप से खड़ा नहीं हो पातें हैं। यह कहना है- जिले के सीएस डॉ विजय कुमार का। उन्होंने  बताया की यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए, तो यह बच्चे के चलने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। यह विकार लगभग 1,000 नवजात शिशुओं में से 01 में पाया जाता है और लड़कों में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं। क्लब फुट का कारण अनुवांशिक, पर्यावरणीय कारक या गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास में बाधा, मांसपेशियों और नसों की असामान्यता हो सकता है। वहीं जिला समन्वयक डॉ रंजन मिश्रा ने बताया की जिले में ऐसे बच्चों की पहचान व ईलाज क़ो लेकर स्वास्थ्य विभाग काफ़ी गंभीर है, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत क्लबफुट से पीड़ित 04 बच्चों का फॉलोअप किया जा रहा है। वहीं इस सप्ताह 08 बच्चों क़ो निःशुल्क बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच पटना भेजा गया। उन्होंने बताया की इन बच्चों का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में किया जाता है। जहां ईलाज के बाद बच्चे के जीवन में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगती है।
शुरुआती चरण में पहचान कर ईलाज जरूरी :
जिले के एसीएमओ डॉ रमेश चंद्रा ने कहा की क्लबफुट जैसी जन्मजात विकृति का समय पर इलाज अत्यंत आवश्यक है। हमारा उद्देश्य हर जरूरतमंद बच्चे तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना है। मैं सभी अभिभावकों से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों को समय पर स्वास्थ्य जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र लाएं ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके। स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास समाज के कमजोर वर्गों के लिए एक बड़ी राहत है। क्लबफुट जैसी विकृति से पीड़ित बच्चों को समय पर इलाज और देखभाल प्रदान करके उन्हें सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया जा रहा है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ावा देती है, बल्कि
आरबीएसके की भूमिका है।
आरबीएसके डीआईसी प्रबंधक सह जिला समन्वयक डॉ रंजन कुमार मिश्रा ने बताया कि हमारी टीम नियमित रूप से क्षेत्र का भ्रमण कर क्लबफुट और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को चिह्नित करती है। इन बच्चों को इलाज के लिए सरकारी संस्थानों में ले जाने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाता है। हमारी टीम का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।
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