मोतिहारी, अशोक वर्मा। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त देश के जाने-माने फोटो जर्नलिस्ट रघुराय की मृत्यु पर जिले के फोटो जर्नलिस्टो में शोक व्याप्त हुआ. जिले के फोटो जर्नलिस्ट इम्तियाज अहमद ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि रघु राय की तसवीरे बोलती थी. उनका जीवन उनका कैमरा था. उनकी मृत्यु से हम सभी मर्माहत है.श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए अशोक वर्मा ने कहा कि जब मैं 1980 के दशक में फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया तो मैं रघु राय के विजन को उनकी तसवीरो मे देखा और मेरे अंदर का फोटो पत्रकार जग गया, फिर मै उस समय से लगातार फोटो पत्रकारिता करता आ रहा हूं.
उन्होंने कहा कि रघु राय का एक अपना परिपक्व विजन था और वे नेचुरल फोटो ग्राफ पर अधिक जोर देते थे. वह कैमरे से कविता लिखते थे. उनका विषय नेता के बजाय प्रकृति थी.उनके इंटरव्यू को भी मैंने देखा था. एक पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आप दैनिक अखबार के प्रेस फोटोग्राफर के पद को छोड़कर स्वतंत्र फोटोग्राफी क्यों करते हैं? उसके जवाब में उन्होंने कहा था कि अखबार का एक अपना नियम और सिस्टम है और उस सिस्टम में काम करना होता है लेकिन सही फोटो जर्नलिस्ट स्वतंत्र रूप से ही काम कर सकता है बंधन में नहीं कर सकता, इसलिए मैं स्वतंत्र फोटोग्राफी के मार्ग को चुना और अपने काम से संतुष्ट हूं.
श्री वर्मा ने कहा कि रघुराय की तस्वीरें बोलती है चाहे वह तांगे वाले की तस्वीर हो या नाई की दुकान की तस्वीर हो उनकी हर तस्वीर में एक संदेश छिपा होता था. दैनिक जागरण के प्रेस फोटोग्राफर भुवन श्रीवास्तव ने कहा कि रघुराय देश के कोई फोटोग्राफरो के प्रेरणा स्रोत रहे है,उनके कार्य हमेशा अमर रहेंगे. प्रभात खबर के प्रेस फोटोग्राफर पाठक ने उनके कई तस्वीरों की चर्चा की.
अन्य कई छायाकारो एवं पत्रकारों ने भी रघु राय की मृत्यु को दुखद कहा और कहा कि उसकी भरपाई शायद ही निकट भविष्य में हो., शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में वरिष्ठ पत्रकार चंद्रभूषण पांडे, अजहर हुसैन अंसारी, वरिष्ठ पत्रकार हीरालाल, सिद्धार्थ वर्मा,संजीव शाह,नरेंद्र झा, राजन दत्त द्विवेदी ,अरविंद श्रीवास्तव एवं अन्य कई छायाकार पत्रकार थे.
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