- निःशुल्क इलाज के बाद अभिभावकों के चेहरे पर दिखे संतुष्टि के भाव
- जन्मजात कटे होंठ-तालु से पीड़ित 16 बच्चों का हुआ सफल ऑपरेशन
- इस योजना में उपलब्ध है बच्चों की 42 बीमारियों का निःशुल्क इलाज
बेतिया : जिले के बगहा-1 निवासी रवि कुमार की 5 महीने की बच्ची सोनपरी जन्मजात कटे होंठ-तालु से पीड़ित थी। बढ़ते समय के साथ सोनपरी के चेहरे की विकृतियाँ बढ़ती जा रही थी जिससे घरवाले काफ़ी परेशान थे। बच्ची के भविष्य क़ो देखते हुए उसके पिता रवि ने कई डॉक्टर से सम्पर्क किया परन्तु भारी खर्च के बोझ ने प्राइवेट में सर्जरी कराने के हौसले क़ो पस्त कर दिया। ज़ब उनके घर आशा बच्चों के टीकाकरण की जानकारी लेने आई, संयोग से बच्ची के माता-पिता ने बच्ची क़ो दिखाया और इलाज के बारे में सलाह माँगी। आशा ने बच्ची क़ो लेकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर आरबीएसके चिकित्सको से सम्पर्क करने क़ो कहा। वहाँ डॉक्टर से दिखाने के बाद कागजी कार्रवाई पूरी होने पर सोनपरी को पूर्वी चम्पारण के रक्सौल डंकन हॉस्पिटल में 23 मार्च क़ो भर्ती किया गया। उसके बाद राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत निःशुल्क सर्जरी कराई गई। 27 मार्च क़ो वह अपने घर लौटी। डंकन हॉस्पिटल में बच्ची और अभिभावक क़ो रहने, खाने-पीने व इलाज की निःशुल्क व्यवस्था का लाभ प्राप्त हुआ।
आरबीएसके के डॉ रंजन मिश्रा ने बताया कि बच्ची के होंठ की सर्जरी हो चुकी है। अब कुछ महीने बाद उसके तालु की दूसरी सर्जरी भी कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जन्मजात कटे होंठ-तालु से पीड़ित जिले के 16 बच्चों का सफल ऑपरेशन हो चुका है। जिले में किसी भी प्रखंड में अगर कटे होंठ-तालु, हृदय में छेद या कोई अन्य जन्मजात रोग से पीड़ित बच्चे हों तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, आशा या आँगनबाड़ी केंद्र से सम्पर्क करें। बच्ची के पिता ने बताया की वे अन्य लोगों क़ो भी सरकार की इस योजना की जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार क़ो नजदीकी क्षेत्र में इलाज की मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराये जाने पर धन्यवाद दिया।
कम उम्र में सर्जरी कराने पर मिलता है अधिक लाभ:
जिले के सीएस डॉ विजय कुमार ने बताया की कटे होंठ की सर्जरी 3 से 6 महीने की उम्र के बीच व तालु की सर्जरी 1 वर्ष होने के बाद होने पर ज्यादा लाभ मिलता है, रिपोर्टों के अनुसार इस सर्जरी में, कटे होंठ को बंद करने के लिए टांके लगाए जाते हैं। वहीं इस दौरान बच्चे की उचित वजन वृद्धि और पोषण के लिए बारीकी से निगरानी की जाती है, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि भोजन करते समय सांस लेने से संबंधित कोई समस्या न हो। वहीं सर्जरी के बाद, बच्चे को कुछ दिनों तक नरम आहार दिया जाता है।
135
