ब्रह्मकुमारी के पखवाड़ा शिव जयंती महोत्सव अंतर्गत  89 वी त्रिमूर्ति शिव जयंती आयोजित

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अशोक वर्मा

घोड़ासहन ।     नगर के ठाकुर राम मथुरा प्रसाद उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में ब्रह्मकुमारी के स्थानीय सेवा केंद्र द्वारा रविवार को आयोजित 89वी त्रिमूर्ति शिव जयंती के अवसर पर “वर्तमान समय में शिव जयंती का अद्वितीय महत्व” विषयक सेमिनार का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम में काफी संख्या में सेवा केंद्र से जुड़े हुए भाई-बहनों के अलावा बनकटवा,बडरवा के भाई बहनो के  साथ काफी संख्या मे,गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में घोड़ासहन प्रखंड प्रमुख भोला प्रसाद यादव,समाजसेवी श्री आसन , रघुनंदन प्रसाद, प्रेम कुमार ,जितेंद्र कुमार ,महंत विनोद साहब, विनय कुमार यादव अरूण कुमार, गोपाल जी और जितेंद्र जी आदि शामिल हुए। सेवा केंद्र प्रभारी बीके मीरा बहन ने उपस्थित सभी भाई बहनों का स्वागत किया तथा शिवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए  कहा कि हरेक कल्प के समापन पर 100 वर्षों का पुरुषोत्तम संगम युग होता है। 1936 मे परमात्मा  के अवतरण के साथ पुरूषोत्तम संगम युग आरंभ होता है। वे भारत की भूमि पर ही अवतरित होते है और पतित दुनिया को पावन बनाने का कार्य करते हैं । कलैया की बीके सुषमा बहन ने विषय पर  कहा कि ब्रह्मा तन का आधार लेकर शिव बाबा विगत 89 वर्षों से चयनित आत्माओं में शक्ति भर रहे हैं। सहज राजयोग का अभ्यास  एवं ईश्वरीय पढ़ाई पढ़ाकर सभी का  भाग्य बना रहे हैं । कुलवी सेवा केंद्र के बीके सुनीता ने कहा की वर्तमान समय परिवर्तन का  है और इस दौर में जो भाई-बहन जितना भाग्य बनाना चाहे परमात्मा से निकट का संबंध बनाकर झोली भर भाग्य बना सकते है । सिमरनगढ़ नेपाल की बीके निर्मला बहन ने शिवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्य पर कहा कि भारत नेपाल पर्व त्योहारों का देश है और सभी पर्व त्योहारों के पीछे आध्यात्मिक रहस्य होते हैं। शिवरात्रि  का भी  आध्यात्मिक रहस्य है । शिवबाबा  पाप कटेश्वर  हैं , वे  बैजनाथ भी  हैं ।शिवलिंग पर तीन पत्ते का बेलपत्र, बेल धतूरा अक का फूल आदि चढ़ाने के पीछे का रहस्य  है कि मन के अंदर  उत्पन्न जितने भी दुराव एवं कटीले विचार हैं उन सभी कांटा को प्रतीकात्मक  शिव बाबा पर  आज के दिन अर्पण कर देना है। बेल चढ़ाने के पीछे का उद्देश्य होता है कि शिव बाबा पर बलि चढ़ना। बलि अर्थात विक्रमो की बलि देना और शिवबाबा के बातों को जीवन में धारण करना है। धतूरा और अक का फूल जो जहरीला होता है, के पीछे का रहस्य यह है कि अपने अंदर उत्पन्न तमाम जहरीले विचार आदि को शिव पर अर्पण कर  बिल्कुल ही हल्का हो जाए। तमाम बीती हुई बातों को बिंदी लगा दें ।यह सब बातें जीवन में धारण करने की होती है ।हम पर्व त्यौहार तो मनाते हैं लेकिन उसके पीछे के आध्यात्मिक रहस्य को अगर समझ ले और धारण करें तो हमारा जीवन सुखमय हो सकता है। कार्यक्रम का उद्घाटन बीके मीरा बहन एवं नेपाल से पधारे हुए सभी बहनों के साथ-साथ अतिथि गणों ने दीप प्रज्वलित कर किया।उपस्थित भाई बहनों को सेवा केंद्र की ओर से बीके मीरा बहन ने सम्मानित किया एवं शिवरात्रि की बधाई दी कार्यक्रम के आरंभ में बड़ा ही आकर्षक झांकी युक्त शोभायात्रा निकाली गई शोभायात्रा में शिव पार्वती की बहुत या सुदर झांकी सजी थी। और झांकी यात्रा के भाई बहनों ने नारा दिया  कि– जागो जागो भारतवासी भारत में भगवान आए है, कलयुग जा रहा है सतयुग आ रहा है, सभी तरह का व्यसन छोड़ो शिव बाबा से नाता जोड़ो आदि था। कार्यक्रम के समापन पर नेपाल से पधारी  टीचर वहनों के साथ अतिथिगणो ने शिव ध्वज फहराया तथा झंडा के नीचे  सभी ने संकल्प लिया कि न किसी को दुख देंगे ना दुख लेंगे ,किसी तरह का व्यसन नहीं लेंगे ,सभी के लिए शुभकामना और शुभकामनाएं करेंगे आदि आदि था। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथि गणों को ईश्वरीय सौगात भेट की गई

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