Live News 24×7 के लिए मोतिहारी से कैलाश गुप्ता।
मोतिहारी। कहा जाता है कि शिक्षा ज्ञान की गंगोत्री होती है, शिक्षकों में ज्ञान का भंडार होता है। जिसका संचालन विभाग के आला अधिकारी करते है, तो जाहिर है कि शिक्षकों से ज्यादा ज्ञान विभाग के आला अधिकारियों के पास होगी, क्योंकि किसी पदाधिकारी के पद को पाने के लिए एक व्यक्ति को काफी कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है।
ऐसे में किसी जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने कलम से अस्पष्ट पत्र (जिसका कोई मतलब नही निकलता हो ) जारी करता हो तो उसके कार्य क्षमता और शैक्षणिक/प्रशैक्षणिक योग्यताओं पर प्रश्रचिन्ह लगना लाजमी है।
जी हाँ ऐसा ही कृत्य पूर्वी चंपारण के जिला शिक्षा पदाधिकारी संजीव कुमार का है। इनके द्वारा एक पत्र संख्या 2347 दिनांक 17.08.24 जारी की गई है, जिसका विषय है-अधिनियम का उलंघन एवं विभागीय निदेश की अवहेलना।

यह पत्र किसको सम्बोधित है इसका कोई नाम अंकित नही है। वही पत्र के प्रतिलिपि में जिला के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का नाम संबोधित है जिनको निदेश दिया गया है कि विद्यालय संचालक को पत्र तामिला कराना सुनिश्चित करेंगे।
वही पत्र के मजमून में कहा गया है कि उपरोक्त विषयक शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18 के उप धारा 11 के कंडिका -2 (छ) के तहत यह कि निदेशक प्राथमिक शिक्षा अथवा जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा समय-समय पर मांगी गई सूचनाओं एवं प्रतिवेदनों को विधालय द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा तथा मान्यता की शर्तों को लगातार पूरा करने तथा इसे सुनिश्चित करने के लिए अथवा विधालयी क्रियाकलाप की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार/स्थानीय प्राधिकार द्वारा जो निदेश जारी किए जाएंगे, उनका अनुपालन विधालय द्वारा किया जाएगा।
साथ ही तीन विंदु अंकित है जिसमें कहा गया है कि
01-आपके द्वारा ज्ञानदीप पोर्टल के माध्यम से अपने विधालय के पड़ोस के अलाभकारी समूह और कमजोर वर्ग श्रेणी के छात्र -छात्राओ का नामांकन नहीं लिया गया।
02-अपने विधालय में अध्ययनरत कक्षावर सभी छात्र -छात्राओ का ई-शिक्षा कोष पर प्रबिष्ट नहीं कराया गया।
03-ज्ञानदीप पोर्टल पर intake Capacity अपलोड/अपडेट नहीं किया गया।
इस अस्पष्ट पत्र के आलोक में जब जिला शिक्षा पदाधिकारी संजीव कुमार से वार्ता किया गया तो इन्होंने गोल-मटोल जबाब देते हुए कहा कि जिसको देना है उसका नाम हाथ से लिखा जाएगा वही पत्र का मतलब स्पष्ट नही कर पाए।
नियमतः इस प्रकार के विषयक पत्रों में संबंधित व्यक्ति/संस्थान को संबंधित कार्यों के विरुद्ध कार्रवाई की बात व चेतावनी देते हुए उक्त कार्य को पूर्ण करने की समय सीमा निर्धारित की जाती है जो नही किया गया है।
मजे की बात तो यह है कि संबंधित व्यक्ति/संस्थान का नाम अंकित किये बिना ही जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा उक्त पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया गया और संबंधित लिपिक द्वारा आनन फानन में उक्त पत्र पर पत्रांक दिनांक चढ़ाकर सार्वजनिक ग्रुपों में शेयर भी कर दिया गया।
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