रामगढ़ एसबीएम में नियुक्ति घोटाला की चर्चा

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रामगढ़: रामगढ़ जिले में एक बार फिर स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन में जिला स्तर पर की जा रही नियुक्ति में धांधली की बू आने लगी है.। एक खबरिया चैनल की खबर को सही माने तो जिन अभ्यर्थियों को गिरिडीह और हजारीबाग जैसे जिलों के साथ स्वयं रामगढ़ जिले ने मेधा सूची में रिजेक्ट कर दिया, वो एक बार फिर मेधा सूची में शामिल कर लिये गये हैं.

रामगढ़ जिले में पिछले 3 सालों से स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन के अंतर्गत की जाने वाली नियुक्ति विवादों में रही है. अब तक धांधली के कारण ही जिला स्तर पर नियुक्ति कई बार रद्द हो गई. एक बार फिर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया, जिसमें जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के 5 पदों के लिए नियुक्ति की जानी है. इसके लिए आपत्ति मांगी जा चुकी है और आपत्ति दर्ज होने के बाद 28 जून को लिखित और दक्षता परीक्षा का की तिथि निर्धारित की गई है. लेकिन इस बार भी मेधा सूची में भारी गडबडी नजर आ रही है.

नियुक्ति में वैसे अभ्यर्थियों को जगह दी जा रही है, जिन्हें स्वयं रामगढ़ जिले ने जिला समन्वयक के पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया. उन्हीं में से एक हैं लक्ष्मी शर्मा. लक्ष्मी शर्मा को एक मेरिट सूची में डिसक्वालिफाई किया गया है जबकि दूसरे मेरिट में इसे एमआईएस कोर्डिनेटर पद के लिए टॉप में जगह दी गई है. पूर्व के मेरिट में इसी कैंडिडेट को नो रिलिवेंट एक्सपीरियंस कहकर मेरिट में जगह नहीं दी गयी थी. इस लिस्ट में लक्ष्मी शर्मा ही एकलौती कैंडिडेट नहीं है. इस सूची में नीरज कुमार दुबे और प्रदीप कुमार भी शामिल हैं.

प्रदीप कुमार अकाउंटेंट के पद पर रामगढ़ जिले में कार्यरत हैं. पूर्व के मेरिट में सम्बंधित क्षेत्र में अनुभव नहीं होने के कारण फरवरी 2024 में उन्हें डिसक्वालिफाई किया जा चुका है. लेकिन नए संसोधित सूची में उन्हें मेरिट में जगह दी गई है. उन्हें हजारीबाग और गिरिडीह के साथ स्वयं रामगढ़ ने एमआईएस और आईईसी पद के लिए अयोग्य माना. क्योंकि पद का अनुभव कम से तीन वर्ष होनी चाहये, जो इनके पास नहीं था. दूसरी तरफ जिला समन्वयक के लिए 5 वर्ष अनुभव चाहिए लेकिन रामगढ़ ने इसे योग्य मान लिया है. एक और मामला नीरज कुमार दुबे का है. हजारीबाग जिले ने नीरज कुमार दुबे को डिसक्वालिफाई कर दिया. लेकिन रामगढ़ ने एमआईएस पद के लिए उन्हें योग्य मान लिया है.

सालों से धांधली के कारण यहां नियुक्ति लटकी हुई है. एक बार फिर धांधली की बू आ रही है. क्योंकि तो पूर्व की सूची सही है या फिर अब की सूची सही है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर मेधा सूची तैयार कौन करता है. यदि वो बार-बार गलत कर रहा है तो उस पर विभाग कार्रवाई क्यों नहीं करता. हम कैंडिडेट को दोष नहीं दे सकते. आवेदन करना उनका काम है. लेकिन सही गलत का चयन करना ऑफिस का काम है. वैसे लोग इसमें जरूर दोषी हैं जो ऐसी सूची तैयार कर रहे है.

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