कैमूर : झाड़ियों में मिली 7 माह की बच्ची, ग्रामीण की सजगता से बची मासूम की जान

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चैनपुर। कैमूर जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के मदरा गांव में झाड़ियों के पास लावारिस हालत में 7 माह की बच्ची मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मासूम को इस हालत में देख ग्रामीण सुनीता देवी ने मानवता और सजगता का परिचय देते हुए तत्काल बच्ची को अपने संरक्षण में लिया और इसकी सूचना पुलिस तथा चाइल्ड हेल्पलाइन को दी। सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम सक्रिय हुई और बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मदरा गांव में झाड़ियों के पास बच्ची को लावारिस अवस्था में देखे जाने के बाद ग्रामीण सुनीता देवी ने बिना देर किए उसे अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद उन्होंने आपातकालीन हेल्पलाइन 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन एवं चाइल्ड हेल्पलाइन के कर्मी मौके पर पहुंचे और संयुक्त रूप से बच्ची का रेस्क्यू किया।

रेस्क्यू के बाद बच्ची को तत्काल चिकित्सकीय जांच के लिए सदर अस्पताल, कैमूर (भभुआ) ले जाया गया। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने बच्ची की स्वास्थ्य जांच की। प्रशासन के अनुसार चिकित्सकीय परीक्षण में बच्ची स्वस्थ पाई गई और फिलहाल वह खतरे से बाहर है।

बच्ची के रेस्क्यू के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम उसकी सुरक्षा, पोषण और देखरेख में जुटी है। प्रशासन की निगरानी में बच्ची को आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।

सहायक निदेशक, बाल संरक्षण इकाई, कैमूर के अनुसार अस्पताल से डिस्चार्ज की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्ची को उसके सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार दत्तक ग्रहण संस्थान, कैमूर में आवासित कराया जाएगा। इसके बाद बच्ची से संबंधित कानूनी एवं पुनर्वास प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर मासूम बच्ची को झाड़ियों में लावारिस हालत में छोड़ने की नौबत क्यों आई। हालांकि, समय रहते ग्रामीण की नजर पड़ने और उनकी तत्परता से बच्ची को सुरक्षित बचाया जा सका। ग्रामीण सुनीता देवी की सजगता ने मानवता की मिसाल पेश की है।

जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई बच्चा लावारिस या असुरक्षित अवस्था में मिलता है तो उसे अकेला छोड़ने के बजाय तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112 या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। समय पर मिली सूचना किसी मासूम की जिंदगी बचाने में अहम साबित हो सकती है।

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