PM आवास योजना में फर्जीवाड़े पर फूटा महिलाओं का गुस्सा: TMC नेता को घेरा, सिर पर फोड़े अंडे और कराया इलाका भ्रमण; जानें पूरा मामला

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पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दुर्गापुर के कोक ओवन थाना क्षेत्र अंतर्गत आनंदपुर इलाके में सरकारी आवास दिलाने के नाम पर हुई कथित धांधली से नाराज महिलाओं ने स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता को बीच सड़क पर घेर लिया। आरोप है कि गरीब परिवारों के नाम पर ऑनलाइन रिकॉर्ड में योजना को ‘सफल’ दर्शा दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत यह थी कि इन परिवारों को न तो पक्के मकान की एक ईंट नसीब हुई और न ही किसी वित्तीय सहायता की कोई किस्त उनके बैंक खातों में पहुंची।

वर्षों से पक्की छत की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों को जब इस डिजिटल फर्जीवाड़े की भनक लगी, तो महिलाओं के सब्र का बांध पूरी तरह टूट गया। आक्रोशित महिलाओं के भारी हुजूम ने स्थानीय टीएमसी नेता विश्वजीत माझी (उर्फ बिशु माझी) को आनंदपुर में घेरकर तीखे सवालों की बौछार कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि महिलाओं ने नेता के सिर पर कई बार अंडे फोड़ दिए और उन्हें पूरे मोहल्ले में पैदल घुमाकर जमकर नारेबाजी की। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया और मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया।

कागजों में मकान ‘सफल’, जमीन पर फूस की झोपड़ी: ऐसे उजागर हुआ पूरा खेल

प्रदर्शनकारी महिलाओं और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ समय पहले टीएमसी नेता बिशु माझी ने कई गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से मुलाकात की थी। उन्होंने दावा किया था कि वह केंद्र और राज्य सरकार की आवास योजना के तहत सभी को पक्का मकान स्वीकृत करवा कर देंगे। इसके नाम पर ग्रामीणों से आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक पासबुक की प्रतियां और अन्य आवश्यक दस्तावेज एकत्र किए गए थे। ग्रामीण महीनों तक अपने घरों की स्वीकृति का इंतजार करते रहे, लेकिन जब कोई काम आगे नहीं बढ़ा, तो कुछ युवाओं ने सरकारी पोर्टल पर लाभार्थियों की सूची की जांच की।

ऑनलाइन रिकॉर्ड की पड़ताल करते ही चौंकाने वाला सच सामने आया। पोर्टल पर उन गरीब महिलाओं के नाम के आगे आवास आवंटन की प्रक्रिया को ‘सफल’ (Completed/Success) दिखाया जा चुका था। यह देखकर लोगों के होश उड़ गए, क्योंकि असलियत में वे आज भी टूटी-फूटी झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग करके आवास योजना की राशि हड़प ली गई है और कागजों में फर्जी तरीके से मकान निर्माण पूरा दिखा दिया गया है।

सिर पर फोड़े अंडे और गलियों में घुमाया: महिलाओं के तीखे सवालों से घिरे नेताजी

रविवार को जैसे ही टीएमसी नेता बिशु माझी इलाके में पहुंचे, दर्जनों महिलाओं ने लाठी-डंडों और नारों के साथ उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। महिलाओं ने सीधा सवाल दागा कि जब उन्हें रहने के लिए घर नहीं मिला, तो फिर सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम के आगे ‘सफल’ का मुहर किसने और क्यों लगवाया? शुरुआती नोकझोंक के बाद माहौल बेहद उग्र हो गया। महिलाओं ने अपने थैलों से अंडे निकाले और टीएमसी नेता के सिर पर दे मारे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नेताजी हाथ जोड़कर माफी मांगते और खुद को निर्दोष बताते रहे, लेकिन महिलाओं का गुस्सा शांत नहीं हुआ। आक्रोशित भीड़ ने उन्हें पूरे आनंदपुर इलाके की गलियों में घुमाया और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाते हुए उनकी जवाबदेही तय करने की मांग की। इस दौरान आसपास के लोग छतों और बालकनी से इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाते नजर आए, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद नेता को भीड़ के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला।

‘फंड जारी हुआ तो पैसा किसकी जेब में गया?’: ग्रामीणों ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग

इस घटना के बाद दुर्गापुर और आसपास के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। पीड़ित महिलाओं ने स्थानीय प्रशासन और जिला मजिस्ट्रेट से इस पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। स्थानीय निवासियों ने मुख्य रूप से तीन तीखे सवाल प्रशासन के सामने रखे हैं: पहला, अगर वास्तविक लाभार्थियों को एक रुपया भी नहीं मिला, तो सरकारी पोर्टल पर उनके नाम सफल लाभार्थियों की श्रेणी में कैसे दर्ज हो गए? दूसरा, क्या इन लाभार्थियों के नाम पर सरकार की ओर से निर्माण राशि या सब्सिडी जारी हो चुकी थी? और तीसरा, यदि फंड जारी हुआ था, तो वह किस बैंक खाते में ट्रांसफर हुआ और वह पैसा किसकी जेब में गया?

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक इलाके का मामला नहीं है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के जमीनी स्तर के कई नेता आवास योजना और कट-मनी के इस खेल में शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया और असली लाभार्थियों को उनका हक नहीं दिलाया, तो वे राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।

बंगाल की राजनीति में गरमाया आवास योजना घोटाला: विपक्ष का ममता सरकार पर हमला

पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा (100 दिन काम) में भ्रष्टाचार का मुद्दा काफी समय से केंद्रीय जांच एजेंसियों और राजनीतिक दलों के बीच टकराव का कारण बना हुआ है। इस ताजा घटना ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को राज्य की तृणमूल सरकार पर हमला बोलने का एक और बड़ा हथियार दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के कल्याण के लिए भेजी जाने वाली धनराशि को टीएमसी के बिचौलिए और पंचायत स्तर के पदाधिकारी हड़प रहे हैं।

विपक्ष ने मांग की है कि पूरे राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के डिजिटल रिकॉर्ड्स और जमीनी स्थिति का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाना चाहिए ताकि गरीबों के हक पर डाका डालने वाले सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सके। दूसरी तरफ, स्थानीय टीएमसी नेतृत्व ने इस मामले पर दूरी बनाते हुए कहा है कि कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है और यदि योजना में कोई तकनीकी त्रुटि या स्थानीय स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो प्रशासनिक जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल आनंदपुर क्षेत्र में तनाव को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।

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