- सड़क पर फैला ज्वलनशील तेल, बाल्टी-डिब्बे लेकर पहुंच गए लोग; हादसे के बाद भी नहीं दिखी खतरे की परवाह
कोडरमा: कोडरमा थाना क्षेत्र के मेघातरी स्थित घाटी में शनिवार की सुबह कच्चा तेल लदा एक टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में टैंकर चालक घायल हो गया। दुर्घटना के बाद जहां मौके पर राहत और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत थी, वहीं टैंकर से तेल निकलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और तेल लेने की होड़ मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टैंकर के पलटने के बाद सड़क के आसपास तेल फैलने लगा। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जुट गई। कई लोग बाल्टी, डिब्बे और अन्य बर्तन लेकर तेल भरते नजर आए। भीड़ में इस बात की चिंता कम और तेल ले जाने की होड़ ज्यादा दिखाई दी।
आग लग जाती तो कौन होता जिम्मेदार?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मौके पर किसी कारण से आग लग जाती तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती थी? ज्वलनशील तेल से भरे दुर्घटनाग्रस्त टैंकर के आसपास इस तरह लोगों का जमा होना किसी बड़े हादसे को न्योता देने से कम नहीं था।
टैंकर के आसपास आग, बीड़ी-सिगरेट या किसी अन्य ज्वलनशील स्रोत से निकली छोटी सी चिंगारी भी गंभीर रूप ले सकती थी। ऐसे में दुर्घटनास्थल पर भीड़ को नियंत्रित करना और टैंकर के आसपास सुरक्षा घेरा बनाना बेहद जरूरी था।
हल्दिया से नेपाल जा रहा था टैंकर
जानकारी के मुताबिक, टैंकर कोलकाता के हल्दिया से कच्चा तेल लोड कर कोडरमा के रास्ते नेपाल जा रहा था। मेघातरी घाटी में पहुंचने के दौरान टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। दुर्घटना में चालक घायल हो गया।
हादसे के बाद घटनास्थल पर काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। तेल लेने की होड़ के कारण दुर्घटनास्थल की स्थिति और भी संवेदनशील हो गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
ज्वलनशील पदार्थ से भरे टैंकर के पलटने के बाद घटनास्थल को तत्काल सुरक्षित क्षेत्र घोषित कर लोगों को दूर रखना जरूरी था। लेकिन भीड़ का इस तरह टैंकर के पास पहुंच जाना कई सवाल खड़े करता है।
मेघातरी घाटी में हुए इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐसे संवेदनशील हादसों के दौरान प्रशासन और पुलिस की त्वरित सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। यदि समय रहते भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जाता और कोई अप्रिय घटना घट जाती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
19