पूर्वी चंपारण में 350 करोड़ से लगेगा मदर डेयरी का दूसरा प्लांट

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  • मछली से शहद तक करोड़ों की परियोजनाओं की बरसात
  • पिपराकोठी में फिश प्रोसेसिंग प्लांट और एक्वाकल्चर पार्क
  •  6500 गांवों में खुलेंगी दुग्ध सहकारी समितियांसी
25 करोड़ की नस्ल सुधार योजना से बढ़ेगा दूध उत्पादन, हनी प्रोसेसिंग प्लांट से मधुमक्खी पालन को मिलेगा उद्योग का आकार – हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलने की उम्मीद।
सिर्फ खेत और फसल के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा किसानों को दूध, मछली और शहद को उद्योग से जोड़कर गांवों में कमाई और रोजगार की नई इबारत लिखने की तैयारी शुरू हो गई है। महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित कृषि, पशुपालन एवं मात्स्यिकी उद्यमी उन्नति मेला के तीसरे दिन मोतिहारी को एक के बाद एक बड़ी परियोजनाओं की सौगात मिली। करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से मदर डेयरी का दूसरा प्लांट स्थापित करने की घोषणा ने पूरे चंपारण में हलचल पैदा कर दी।
इसके साथ ही पिपराकोठी में फिश प्रोसेसिंग प्लांट, एक्वाकल्चर पार्क और हनी प्रोसेसिंग प्लांट की योजना सामने आई है। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से किसानों, पशुपालकों, मत्स्यपालकों और मधुमक्खी पालकों को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और बाजार की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
6500 गांवों में दुग्ध समितियां, गांव-गांव पहुंचेगा डेयरी कारोबार
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मीनेश साह ने बताया कि बिहार में अगले पांच वर्षों में करीब 6500 गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का लक्ष्य है। करीब 6000 गांवों में पहले से समितियां काम कर रही हैं। इन्हें ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम और बल्क मिल्क कूलर
गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का लक्ष्य है। करीब 6000 गांवों में पहले से समितियां काम कर रही हैं। इन्हें ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम और बल्क मिल्क कूलर जैसी आधुनिक सुविधाओं से मजबूत किया जाएगा।
25 करोड़ से नस्ल सुधार, 30 हजार अच्छी नस्ल की गायों का लक्ष्य
केंद्र सरकार के कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत 25 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नस्ल सुधार योजना चल रही है। 100 एआई तकनीशियनों को प्रशिक्षित कर गांव-गांव भेजा गया है। योजना करीब 2700 गांवों तक पहुंच चुकी है और 25 हजार से अधिक किसान इससे जुड़ चुके हैं। चंपारण व आसपास के क्षेत्रों में करीब 30 हजार अच्छी नस्ल की गायें उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
मछली और शहद को मिलेगा बड़ा बाजार
सांसद राधामोहन सिंह ने पिपराकोठी में प्रस्तावित फिश प्रोसेसिंग प्लांट और एक्वाकल्चर पार्क को उत्तर बिहार के मत्स्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। इससे मछली उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार की नई व्यवस्था विकसित होने की उम्मीद है।
वहीं हनी प्रोसेसिंग प्लांट से मधुमक्खी पालकों को शहद के संग्रह, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन का बेहतर आधार मिलेगा। इससे ग्रामीण युवाओं और छोटे किसानों के लिए रोजगार की नई संभावनाएं बन सकती हैं।
कृषि अब सिर्फ खेती नहीं, गांवों में खड़ा होगा उद्योग
सांसद ने कहा कि डेयरी, मत्स्य, मधुमक्खी पालन और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों की आय बढ़ाने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुलेंगे। कार्यक्रम में विधायक सच्चिद्र प्रसाद सिंह, श्यामबाबू प्रसाद यादव, कृष्णनंदन पासवान, प्रमोद कुमार, राज्य मत्स्य आयोग के अध्यक्ष ललन सहनी, सचिव शीर्षत कपिल अशोक पिपरा कोठी कृषि विज्ञान केंद्र के डॉक्टर अरविंद कुमार सिंह, जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव, सहित कई अधिकारी, वैज्ञानिक, पशुपालक, मत्स्यपालक और उद्यमी मौजूद रहे।
चंपारण के लिए यह सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उत्पादन से प्रसंस्करण, बाजार और रोजगार तक पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़ने की बड़ी पहल मानी जा रही है। योजनाएं समय पर जमीन पर उतरीं तो चंपारण की पहचान कृषि उत्पादन के साथ कृषि आधारित उद्योग के बड़े केंद्र के रूप में भी बन सकती है।
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