देश की राजनीति में आर्थिक मुद्दे और विकास दर के आंकड़े अक्सर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग का मुख्य केंद्र रहे हैं। जब भी अर्थव्यवस्था के नए आंकड़े सामने आते हैं, पक्ष और विपक्ष अपने-अपने नजरिए से जनता के सामने तस्वीर रखते हैं। वर्तमान में पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों को लेकर देश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में दर्ज की गई 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। मुख्य विपक्षी दल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर आर्थिक आंकड़ों में हेरफेर करने, आंकड़ों की बाजीगरी दिखाने और देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाकर जनता को गुमराह करने का खुला आरोप लगाया है। इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती असमानता जैसे बुनियादी मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
जीडीपी के आंकड़ों में हेरफेर का कांग्रेस का गंभीर आरोप
आर्थिक मोर्चे पर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि बार-बार कार्यप्रणाली (Methodology) और गणना के तरीकों को बदलकर मोदी सरकार जीडीपी के आंकड़ों को अपनी सुविधानुसार सेट कर रही है, जबकि देश की जमीन पर बदहाल आर्थिक हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि आम आदमी की रसोई लगातार महंगी होती जा रही है और मध्य वर्ग के लिए अपने सपनों का घर बनाना भी अब एक दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। जयराम रमेश ने आंकड़ों के गणित को समझाते हुए कहा कि नॉमिनल (Nominal) और रियल (Real) जीडीपी के बीच का जो अंतर महंगाई को दर्शाता है, वह सरकारी आंकड़ों में महज 2.3 प्रतिशत बताया जा रहा है, जबकि इसी तिमाही के दौरान थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर 9 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है। पार्टी का कहना है कि यह एक स्पष्ट और बड़ी विसंगति है जो सरकारी दावों की पोल खोलती है। यदि सरकार पूरी ईमानदारी के साथ पारदर्शी आंकड़े देश के सामने पेश करे, तो वास्तविक विकास दर का आंकड़ा इसके मुकाबले काफी कम निकलेगा।
मल्लिकार्जुन खरगे का पीएम मोदी पर पलटवार, तीन ‘यू’ का किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहली तिमाही की जीडीपी ग्रोथ पर खुशी जताए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ा पलटवार किया। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री यह कह रहे हैं कि पूरा देश जीडीपी ग्रोथ का जश्न मना रहा है, तो शायद यह सुविधा केवल चुनिंदा लोगों या सरकार के पास उपलब्ध है, आम देशवासी के पास नहीं। आम जनता का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि देश के नागरिक इस समय तीन ‘यू’ यानी असाधारण बेरोजगारी (Unemployment), असहनीय महंगाई (Unbearable Inflation) और बेलगाम असमानता (Unchecked Inequality) के त्रिशूल तले बुरी तरह दबे हुए हैं और इन सबकी पूरी जिम्मेदारी वर्तमान सरकार की है। खरगे के मुताबिक देश में बेरोजगारी का संकट पिछले 50 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है, जहां लगभग 40 प्रतिशत युवा ग्रेजुएट होने के बावजूद बिना नौकरी के भटक रहे हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जुलाई 2026 में 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के हर छह में से एक युवा के पास रोजगार नहीं था, जिससे यह साबित होता है कि हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा पूरी तरह से टूट चुका है।
रसोई से लेकर आम उपभोक्ता वस्तुओं के आसमान छूते दाम
आम नागरिकों के दैनिक जीवन की कठिनाइयों को रेखांकित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आज गरीब और मध्यम वर्ग के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी दूभर हो गया है। बाजार में चीनी, प्याज, टमाटर, दाल, खाद्य तेल, चावल, दूध और रसोई में इस्तेमाल होने वाली हर एक जरूरी चीज के दाम आसमान छू रहे हैं। इसके अलावा पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) और सीएनजी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण आम मिडिल क्लास परिवार किसी तरह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। गरीबों की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश के सबसे गरीब वर्ग ने तो अब व्यवस्था से किसी भी प्रकार की उम्मीद ही छोड़ दी है। खरगे ने कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि देश में आर्थिक असमानता का स्तर अब औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के दौर से भी बदतर स्थिति में पहुंच गया है। सरकार की पूरी आर्थिक नीति केवल चुनिंदा पूंजीपतियों यानी क्रोनी कैपिटलिज्म को बढ़ावा देने के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके तहत वर्ष 2014 से लेकर अब तक 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कॉर्पोरेट लोन माफ किए जा चुके हैं।
‘फेक इन इंडिया’ और मेक इन इंडिया के दावों पर तंज
कांग्रेस पार्टी ने सरकार की प्रमुख योजनाओं और विज्ञापनों पर भी जोरदार कटाक्ष किया। जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की बहुप्रचारित योजना ‘मेक इन इंडिया’ ने भले ही जमीन पर बहुत कम लक्ष्य हासिल किए हों, लेकिन मोदी सरकार की एक अन्य सिग्नेचर स्कीम ‘फेक इन इंडिया’ बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार विदेशों में भारत की आर्थिक प्रगति की खूबसूरत तस्वीर पेश करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश का युवा रोजगार के लिए दर-दर ठोकर खा रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा जनता को सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने जैसी दी जाने वाली नसीहतों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस तरह की सलाहें खुद इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि देश की अर्थव्यवस्था की जमीनी हकीकत कितनी कमजोर और चिंताजनक हो चुकी है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी और प्रचार की राजनीति छोड़कर देश की जनता को वास्तविक रोजगार, सस्ती वस्तुएं और पारदर्शी आर्थिक नीतियां उपलब्ध कराए।
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