खगोल विज्ञान प्रेमियों के लिए साल 2026 का यह हफ्ता बेहद रोमांचक और खास रहने वाला है, क्योंकि आसमान में एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत खगोलीय घटना घटने जा रही है। अंतरिक्ष विज्ञान की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते लगने वाले चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) के दौरान चांद का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की घनी परछाई में छिप जाएगा और वह पूरी तरह से एक नए और कॉपर-रेड रूप में नजर आएगा। इस अनोखे आंशिक चंद्र ग्रहण को लेकर दुनिया भर के खगोलविदों और स्टारगेजर्स में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। चूंकि यह घटना इस साल के सबसे बड़े और आकर्षक चांद के दीदार से जुड़ी है, इसलिए हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि इस खगोलीय रोमांच का दीदार आखिर किन-किन देशों में हो सकेगा और इसका भारतीय उपमहाद्वीप पर क्या असर पड़ेगा।
कब और कैसे लगेगा साल 2026 का यह आंशिक चंद्र ग्रहण
खगोलीय गणनाओं के अनुसार, यह deep partial lunar eclipse आगामी 28 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है। इस दौरान जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरती है, तो पृथ्वी की मुख्य छाया (Umbra) का 93 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चंद्रमा के एक बड़े हिस्से को ढंक लेता है। भारतीय समयानुसार (IST) इस ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर पेनम्ब्रा स्पर्श के साथ होगी, जबकि मुख्य आंशिक ग्रहण सुबह 8 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर दोपहर 11 बजकर 21 मिनट तक चलेगा। इस ग्रहण का सबसे चरम और मुख्य आकर्षण सुबह 9 बजकर 42 मिनट पर होगा, जब चांद का लगभग 96.2 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की काली छाया में समा चुका होगा। हालांकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है, लेकिन इसका दायरा इतना बड़ा होगा कि यह पूर्ण ग्रहण जैसा ही भव्य और डरावना सा लाल रंग का दिखाई देगा।
क्या भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण और क्या है सूतक काल का सच
सबसे बड़ा सवाल जो देश भर के लोगों और खासकर सनातन परंपरा को मानने वालों के मन में उठ रहा है, वह यह है कि क्या यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा? इसका स्पष्ट जवाब यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा। खगोलीय समय के अनुसार जब यह घटना घटित होगी, उस वक्त भारतीय समयानुसार सुबह का समय होगा और भारत में चंद्रमा क्षितिज से नीचे यानी दिन का समय होगा। चूंकि ग्रहण के समय भारत में चांद नजर नहीं आएगा, इसलिए देश में इसका कोई भी भौगोलिक या धार्मिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसका सीधा सा मतलब यह है कि इस दौरान भारत में किसी भी प्रकार का ‘सूतक काल’ (Sutak Kaal) मान्य नहीं होगा। इसी दिन देश भर में भाई-बहन के पवित्र प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) भी मनाया जा रहा है, और ग्रहण के भारत में न दिखने के कारण रक्षाबंधन के पावन पर्व और सभी प्रकार के पारंपरिक अनुष्ठानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
दुनिया के किन हिस्सों में दिखेगा यह अद्भुत खगोलीय नजारा
यह आंशिक चंद्र ग्रहण भले ही भारत में न दिखाई दे, लेकिन दुनिया के अन्य बड़े हिस्सों में इसे पूरी स्पष्टता के साथ देखा जा सकेगा। अंतरिक्ष विज्ञान के जानकारों के अनुसार उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में यह खगोलीय घटना रात के समय या चांद के अस्त होने के वक्त पूरी भव्यता के साथ नजर आएगी। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग बिना किसी विशेष चश्मे या सुरक्षा उपकरण के अपनी नंगी आंखों से इस अद्भुत नजारें का आनंद ले सकेंगे, क्योंकि चंद्रमा या चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी सोलर फिल्टर की आवश्यकता नहीं होती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह साल के सबसे लंबे और गहरे आंशिक चंद्र ग्रहणों में से एक माना जा रहा है।
खगोलीय घटनाओं का रोमांच और अंतरिक्ष विज्ञान का बढ़ता दायरा
साल 2026 अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए एक के बाद एक कई बड़े तोहफे लेकर आया है। साल की शुरुआत से लेकर अब तक कई सूर्य और चंद्र ग्रहण अपनी छटा बिखेर चुके हैं, और अगस्त के महीने में लगा यह चंद्र ग्रहण इस श्रृंखला की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। विज्ञान के जानकारों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का मौका देती हैं, बल्कि आम जनमानस में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा भी पैदा करती हैं। भले ही भारतीय दर्शकों को इस बार अपनी आंखों से इस ग्रहण को देखने का मौका न मिले, लेकिन आधुनिक तकनीक और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए दुनिया के दूसरे कोनों से इस ऐतिहासिक नजारे को ऑनलाइन जरूर देखा जा सकता है।
32