बेंगलुरु में हाहाकार होटलों में चूल्हे बुझने की नौबत, CM सिद्धारमैया ने केंद्र से मांगी इमरजेंसी मदद

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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु इस समय एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट की चपेट में है। शहर में कमर्शियल एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत के चलते होटल, रेस्तरां और कैटरिंग उद्योग ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सीएम ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो शहर की खाद्य सेवा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है और लाखों लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा।

50 हजार की डिमांड और सप्लाई सिर्फ 1 हजार: आंकड़ों ने डराया

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में चौंकाने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बेंगलुरु में होटल, रेस्तरां, पीजी (PG) आवास और कैटरिंग सेवाओं के लिए प्रतिदिन लगभग 50,000 कमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है। इसके विपरीत, वर्तमान में केवल 1,000 सिलेंडर ही उपलब्ध हो पा रहे हैं। मांग और आपूर्ति के बीच के इस विशाल अंतर ने शहर के व्यापारिक ढांचे को हिला कर रख दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा घरेलू एलपीजी को प्राथमिकता देने के हालिया निर्देश के बाद कमर्शियल सप्लाई में यह ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

ईरान-इजरायल तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ ने बिगाड़ा खेल

बेंगलुरु में रसोई गैस का यह संकट सीधे तौर पर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव से जुड़ा है। ईरान और पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से होने वाली वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। हालांकि, भारतीय ध्वज वाले दो जहाज ‘एमटी शिवालिक’ और ‘एमटी नंदा देवी’ 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कमर्शियल उपभोक्ताओं तक राहत पहुंचने में अभी समय लग रहा है।

होटल एसोसिएशन की चेतावनी: बंद हो सकती हैं सैकड़ों दुकानें

बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि कई छोटे रेस्तरां और ढाबे पहले ही बंद हो चुके हैं। अगर सप्लाई चेन को अगले 48 घंटों में दुरुस्त नहीं किया गया, तो सैकड़ों अन्य आउटलेट्स पर ताला लग जाएगा। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि राज्य सरकार कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है, लेकिन बिना केंद्र के अतिरिक्त आवंटन के इस संकट से निकल पाना नामुमकिन है। सरकार ने होटलों को बिजली या अन्य वैकल्पिक ईंधनों पर स्विच करने की सलाह भी दी है।

राहत पैकेज और भविष्य की चुनौतियां

संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रभावित निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है। साथ ही वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। बेंगलुरु जैसे महानगर के लिए, जो पूरी तरह कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर है, यह स्थिति न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक चिंता का विषय भी बन गई है। अब सबकी नजरें केंद्रीय मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह बेंगलुरु को ‘विशेष कोटा’ प्रदान कर इस संकट से उबारता है या नहीं।

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