बिहार बनेगा देश का नया पावर हब₹78,000 करोड़ के निवेश का रोडमैप तैयार, टाटा और अदानी जैसे दिग्गजों की नजर

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 बिहार में औद्योगिक क्रांति और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अगले पांच साल (2026-2031) का मास्टरप्लान जारी कर दिया है। ऊर्जा सचिव पंकज कुमार पाल ने हाल ही में फिक्की (FICCI) और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में खुलासा किया कि राज्य अब बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक बनाने जा रहा है।

निवेश का मुख्य फोकस: कहाँ खर्च होंगे ₹78,000 करोड़?

सरकार ने इस भारी-भरकम निवेश को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है:

1. नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy): * बिहार का लक्ष्य 2030 तक 24 GW (गीगावाट) अक्षय ऊर्जा क्षमता और 6.1 GWh ऊर्जा भंडारण (BESS) हासिल करना है।

सौर ऊर्जा (Solar), विंड पावर और बायोमास परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।

2. ट्रांसमिशन और वितरण का आधुनिकीकरण: * स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को पूरे राज्य में विस्तार दिया जाएगा।

कृषि के लिए ‘डेडिकेटेड फीडर’ की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती और नियमित बिजली मिले।

3. एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Pumped Storage): * नवादा जिले के एकम्बा (1200 MW) और गोसाईतारी (920 MW) में पम्प्ड स्टोरेज पावर हाउस का निर्माण होगा, जिसमें लगभग 13,000 करोड़ का निवेश शामिल है।

टाटा और हिटाची जैसी 17 कंपनियां रेस में

बिहार में निवेश के अनुकूल माहौल को देखते हुए देश की शीर्ष औद्योगिक इकाइयों ने अपनी रुचि दिखाई है:

प्रमुख कंपनियां: टाटा पावर (Tata Power), एनएचपीसी (NHPC), अवाडा ग्रुप (Avaada Group), और हिटाची एनर्जी (Hitachi Energy)।

सरकारी प्रोत्साहन: नई ‘अक्षय ऊर्जा नीति 2025’ के तहत निवेशकों को 100% स्टांप ड्यूटी माफी, बिजली शुल्क में छूट और SGST रिफंड जैसे आकर्षक लाभ दिए जा रहे हैं।

आम जनता और उद्योगों को क्या मिलेगा फायदा?

फायदा विवरण
औद्योगिक हब मजबूत पावर ग्रिड के कारण बिहार अगले 5 वर्षों में एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेगा।
सस्ती बिजली सोलर और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से बिजली उत्पादन की लागत कम होगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
रोजगार सृजन ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण और संचालन से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।
ग्रिड स्थिरता नए पम्प्ड स्टोरेज और बैटरी स्टोरेज सिस्टम से बिजली कटने (Power Cut) की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी।

‘नेट जीरो’ लक्ष्य की ओर कदम

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देशानुसार, यह निवेश न केवल बिहार को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि भारत के 2070 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऊर्जा विभाग ने ‘पम्प स्टोरेज पॉलिसी-2025’ और ‘सोलर पॉलिसी’ के जरिए राज्य को कार्बन-न्यूट्रल बनाने की नींव रख दी है।

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