भारत में BRICS संसदीय फोरम में शामिल नहीं होंगे ईरानी संसद के अध्यक्ष

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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भू-राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र बने भारत में इन दिनों एक बड़े वैश्विक आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम (BRICS Parliamentary Forum) का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें दुनिया के कई प्रमुख उभरते हुए देशों के शीर्ष संसदीय प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन को लेकर कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान की संसद (इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली) के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद बागेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकेंगे। उनके इस दौरे के अचानक रद्द होने से कूटनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और हर कोई इसके पीछे की असली वजह जानने के लिए उत्सुक है।

ईरानी दूतावास ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट की स्थिति

ईरान के शीर्ष नेता और संसद अध्यक्ष के अचानक भारत दौरा रद्द करने की खबरों के तूल पकड़ने के बाद, नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया। दूतावास की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, कुछ अपरिहार्य और अचानक सामने आए हालात के चलते ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ अपनी इस निर्धारित भारत यात्रा पर नहीं आ सकेंगे। ईरानी दूतावास ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इन ‘अदृश्य और आकस्मिक परिस्थितियों’ (Unforeseen Circumstances) के कारण उन्हें अपना यह दौरा अंतिम समय में स्थगित करना पड़ा है। हालांकि, दूतावास ने भारत सरकार द्वारा मेहमाननवाज़ी और इस बड़े वैश्विक मंच की मेजबानी के लिए किए गए शानदार प्रबंधों की खुले दिल से सराहना की है।

क्या ब्रिक्स सम्मेलन में सूना रहेगा ईरान का प्रतिनिधित्व? जानिए कौन ले रहा है हिस्सा

भले ही ईरानी संसद के अध्यक्ष व्यक्तिगत कारणों से इस सम्मेलन में शिरकत नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ब्रिक्स मंच पर ईरान की आवाज नहीं गूंजेगी। ईरानी दूतावास ने साफ कर दिया है कि उच्च स्तरीय बैठक में देश की नुमाइंदगी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अध्यक्ष गालिबफ की जगह ईरान का एक विशेष संसदीय प्रतिनिधिमंडल (Parliamentary Delegation) इस दो दिवसीय प्रतिष्ठित फोरम में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग, विधायी संबंधों को मजबूत करने और डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे आधुनिक वैश्विक मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं में ईरान का पक्ष मजबूती से रखेगा।

वैश्विक कूटनीति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों के बीच अहम है यह आयोजन

मौजूदा समय में पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए ईरान की कूटनीतिक गतिविधियों पर पूरी दुनिया की पैनी नजर बनी हुई है। ऐसे संवेदनशील दौर में ब्रिक्स जैसे शक्तिशाली मंच पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अगुवाई में आयोजित हो रहे इस 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाना, साझा विकास के रास्ते तलाशना और वैश्विक शासन में सुधार करना है। ईरानी संसद के अध्यक्ष के नहीं आने के बावजूद, उम्मीद जताई जा रही है कि यह सम्मेलन आपसी सहमति और एक मजबूत संयुक्त घोषणा पत्र (Joint Declaration) के साथ सफलतापूर्वक संपन्न होगा, जिससे वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज और अधिक बुलंद होगी।

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