संजय भाई सेवा के लिए अमर रहेंगे,  अगले संगमयुग पर फिर मिलेंगे– ब्रह्मा वत्स 

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  • अचानक विदाई ने बिहार ही नहीं, देश और माउंट आबू स्थित मुख्यालय के ब्राह्मण परिवार को भी झकझोर दिया
अशोक वर्मा
मोतिहारी  । गया के मूल निवासी तथा सम्पूर्ण बिहार में ब्रह्माकुमारी के अथक सेवा धारी बीके संजय भाई की मृत्यु दिल्ली में टेंपो की घटना के बाद इलाज के दौरान हो गए के सिर में बड़ी चोट आई थी मैरिज हो गया था प्रयास किया ऑपरेशन भी हुआ पूरी बिहार के अलावा कई प्रदेशों में उनके जीवन रक्षा के लिए योग का वाइब्रेशन दिया  गया लेकिन सब व्यर्थ हो गया और उन्होंने शुक्रवार की सुबह शरीर छोड़  बाप दादा की गोद में अगले पार्ट के लिए चले गए. बीके संजय भाई का अचानक शरीर छोड़ना बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर के ब्राह्मण परिवार और माउंट आबू मुख्यालय के लिए गहरे दुख का कारण बना। उनके अचानक जाने ने जैसे पूरे ब्राह्मण परिवार को पुरुषार्थ के प्रति नए सिरे से जागृत और सचेत भी कर दिया ।
संजय भाई ने बिहार में विशेष रूप से ब्राह्मण परिवार की एकता के लिए लंबे समय तक प्रयास किया। बिहार से मिले कई सुझावों को उन्होंने गंभीरता से लिया। एक बार बिहार में एकता को लेकर उन्होंने  कहा था कि “मेरे सुझाव को शायद कोई नहीं मानेगा, यह सब मेरे बस का नहीं है। शायद बाबा अभी बिहार में बहुत तेज सेवा नहीं कराना चाहते हैं। उनके इन शब्दों में बिहार के प्रति उनकी चिंता और संगठन के प्रति उनका दर्द स्पष्ट दिखाई देता था।वे आबू जानेवाले थे.
उन्होंने  कहा था कि “आबू में मुलाकात होगी। आबू मे बिहार से गये भाई बहन उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे , लेकिन ड्रामा कुछ और ही था। उनका यह संकल्प अधूरा रह गया।
संजय भाई संस्था के कुछ पहलुओं और कुछ सदस्यों की कार्यशैली के आलोचक भी रहे। उनके इस पक्ष को सभी लोग शायद गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन कइयों ने उनके भीतर के दर्द को महसूस किया था।  यदि  संजय भाई पर कोई विस्तार से लिखे तो बहुत कुछ लिख  सकता है। संजय भाई ने यज्ञ को अपना जीवन समर्पित किया था। उनके भीतर सेवा की गहरी लगन थी। हर आत्मा में कुछ न कुछ कमी और कमजोरी होती है, संपूर्ण तो कोई हुआ नहीं है, लेकिन संजय भाई ब्राह्मण परिवार के एक मजबूत स्तंभ थे।
वर्ष 2006 में मोतिहारी में रानी दीदी जी द्वारा दूसरी सेवा केंद्र की स्थापना में  संजय भाई का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आज वे शरीर रूप में नहीं हैं, लेकिन उनकी आलोचना, उनकी प्रेरणा और उनके संदेश को कोई भी ब्राह्मण सहजता से नजरअंदाज नहीं कर सकता। उनके जीवन का अपना एक विशेष रोल था और वह भी इस ड्रामा का ही एक महत्वपूर्ण पार्ट था।
फिलहाल संजय भाई का अचानक जाना पूरे ब्राह्मण परिवार के लिए अपूरणीय दुख का कारण बन गया है। बिहार के सभी ब्रह्मावत्स इस दुखद घड़ी में व्यथित हैं। ईश्वर सभी ब्राह्मण बच्चों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें और उनके लौकिक परिवार को भी संबल दें।
ब्रह्मा बच्चों क़ो गहरा दुख है.
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