भोजपुरी सिनेमा में फिर फूटा विवादों का ज्वालामुखी: पवन सिंह पर अभिनेत्री के तीखे हमले से हड़कंप

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भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सुपरस्टार और ‘पावर स्टार’ के नाम से मशहूर गायक व अभिनेता पवन सिंह एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। अपनी गायकी और अदाकारी से करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले पवन सिंह का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है, लेकिन इस बार उनके खिलाफ लगे आरोपों ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी है। एक प्रमुख भोजपुरी अभिनेत्री ने हालिया इंटरव्यू में पवन सिंह की कार्यशैली, निजी आचरण और महिलाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। अभिनेत्री ने बिना लाग-लपेट के कहा कि पवन सिंह काम के प्रति गंभीर रहने के बजाय अधिकांश समय नशे में डूबे रहते हैं और उनके साथ काम करने वाली अभिनेत्रियों को अत्यधिक असहज और अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इस इंटरव्यू के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर भोजपुरी गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और एक बार फिर इंडस्ट्री के भीतर महिला कलाकारों की सुरक्षा, सम्मान और पेशेवर माहौल को लेकर बहस छिड़ गई है।

‘महीने के 25 दिन दारू में टुल्ल रहते हैं’: अभिनेत्री ने खोली सेट के पीछे की कथित सच्चाई

एक डिजिटल प्लेटफॉर्म को दिए गए विस्फोटक साक्षात्कार में अभिनेत्री ने पवन सिंह के साथ अपने काम करने के अनुभव को साझा करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए। अभिनेत्री ने दावा किया कि इंडस्ट्री में पवन सिंह का रुतबा इतना बड़ा माना जाता है कि कोई भी उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, लेकिन हकीकत यह है कि उनके साथ काम करना किसी भी स्वाभिमानी कलाकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है।

अभिनेत्री ने कड़े शब्दों में कहा, “वे महीने के 30 दिनों में से 25 दिन सिर्फ शराब के नशे में टुल्ल रहते हैं। जब कोई व्यक्ति लगातार नशे की हालत में रहेगा, तो वह अपने काम और सामने वाले इंसान का सम्मान कैसे करेगा? उनके दिमाग में यह बात बैठ चुकी है कि इंडस्ट्री में आने वाली हर लड़की एक जैसी होती है और वे हर अभिनेत्री को उसी गलत नजर से देखते हैं।” अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि शूटिंग के दौरान समय की कोई पाबंदी नहीं होती, सेट पर घंटों इंतजार कराया जाता है और कई बार देर रात अवांछित कॉल्स व बैठकों का दबाव बनाया जाता है। अभिनेत्री के अनुसार, जब किसी महिला कलाकार द्वारा इन अनुचित मांगों या व्यवहार का विरोध किया जाता है, तो उसे फिल्मों और प्रोजेक्ट्स से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है या उसके करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

स्टारडम की आड़ में मनमानी का आरोप: पहले भी विवादों से घिरा रहा है पवन सिंह का नाम

यह पहला मौका नहीं है जब पवन सिंह पर किसी सह-कलाकार या महिला द्वारा इस तरह के संगीन आरोप लगाए गए हों। इससे पहले भी भोजपुरी की शीर्ष अभिनेत्री अक्षरा सिंह के साथ उनके रिश्ते और उसके बाद हुए सार्वजनिक विवाद ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं। अक्षरा सिंह ने भी पवन सिंह पर मानसिक प्रताड़ना, करियर बर्बाद करने की धमकी और हिंसक व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसकी गूंज थानों और अदालतों तक पहुंची थी।

इसके अलावा, पवन सिंह का वैवाहिक जीवन भी लगातार विवादों और मुकदमों से घिरा रहा है। उनकी पहली पत्नी के दुखद निधन के बाद, दूसरी पत्नी ज्योति सिंह के साथ चल रहा तलाक का पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण का मामला भी लंबे समय से कोर्ट में लंबित है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने और राजनीतिक मंचों पर आने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पवन सिंह अपनी छवि को लेकर अधिक सतर्क रहेंगे, लेकिन साथी कलाकारों द्वारा लगाए गए इन ताजा आरोपों ने एक बार फिर उनके निजी जीवन और पेशेवर तौर-तरीकों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

सोशल मीडिया पर भिड़े फैंस और आलोचक: खेमेबाजी में बंटी भोजपुरी इंडस्ट्री

इस सनसनीखेज बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर एक तरह का डिजिटल युद्ध छिड़ गया है। पवन सिंह के कट्टर प्रशंसकों की सेना अभिनेत्री के खिलाफ उतर आई है और उन्हें ‘पब्लिसिटी स्टंट’ करने तथा सुपरस्टार के नाम पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का आरोप लगा रही है। फैंस का तर्क है कि जब भी किसी कलाकार को इंडस्ट्री में चर्चा में आना होता है, तो वह पवन सिंह के नाम का सहारा लेता है।

दूसरी तरफ, फिल्म समीक्षकों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और भोजपुरी सिनेमा के जागरूक दर्शकों का एक बड़ा वर्ग अभिनेत्री के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि भोजपुरी सिनेमा पिछले कई वर्षों से अश्लीलता, पुरुष प्रधान अहंकार और मनमाने स्टारडम की गिरफ्त में है। आलोचकों का मानना है कि यदि कोई महिला कलाकार आगे आकर सेट पर होने वाले दुर्व्यवहार और नशाखोरी पर आवाज उठा रही है, तो उसकी बात को खारिज करने के बजाय इंडस्ट्री के निर्माता-निर्देशकों और एसोसिएशन को इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।

रीजनल सिनेमा में वर्क कल्चर और सुरक्षा का बड़ा सवाल: क्या बदलेगी तस्वीर?

इस पूरे विवाद ने भोजपुरी फिल्म उद्योग के भीतर आंतरिक कार्यप्रणाली और व्यावसायिकता (Professionalism) की गहरी खामियों को उजागर कर दिया है। बॉलीवुड में ‘मी टू’ (MeToo) आंदोलन के बाद जिस तरह आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) और शूटिंग सेट्स पर आचार संहिता लागू करने के प्रयास हुए, भोजपुरी इंडस्ट्री उस तरह के कड़े संस्थागत सुधारों से अब भी कोसों दूर नजर आती है।

अक्सर यह देखा जाता है कि चंद बड़े पुरुष सुपरस्टार्स के इर्द-गिर्द पूरी इंडस्ट्री घूमती है, जिसके कारण छोटे कलाकार, निर्माता और अभिनेत्रियां उनके अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं। जब तक भोजपुरी फिल्म उद्योग में अनुबंधों (Contracts), काम के तय घंटों, नशा मुक्त शूटिंग परिसरों और कलाकारों की गरिमा की रक्षा के लिए सख्त नियम नहीं बनाए जाएंगे, तब तक इस तरह के विवाद और आरोप बार-बार सामने आते रहेंगे। फिलहाल इस पूरे मामले पर पवन सिंह या उनकी प्रबंधन टीम की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से अभिनेत्री के बयानों ने तूल पकड़ा है, उससे यह तय है कि यह विवाद इतनी जल्दी शांत होने वाला नहीं है।

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