घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में कीमती धातुओं की चमक अचानक बहुत बढ़ गई है। पिछले एक सप्ताह के कारोबारी सत्रों के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और स्थानीय हाजिर बाजारों में सोना जहां एक हफ्ते के भीतर लगभग ₹7,960 प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया है, वहीं औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के प्रवाह से चांदी की कीमतों में भी ₹10,000 प्रति किलोग्राम से अधिक की छलांग देखने को मिली है। शादी-ब्याह और आगामी फेस्टिव सीजन की खरीदारी से ठीक पहले आई इस भारी तेजी ने खुदरा खरीदारों के बजट को प्रभावित किया है।
सोने और चांदी के साप्ताहिक भाव में आया बड़ा बदलाव
बुलियन मार्केट के आंकड़ों के अनुसार, सोने और चांदी के वायदा व हाजिर बाजार में साप्ताहिक स्तर पर यह बड़ा अंतर दर्ज हुआ है:
| धातु / श्रेणी | पूर्व स्तर (हफ्ते की शुरुआत) | ताजा स्तर (सप्ताहांत बंद) | कुल साप्ताहिक बदलाव |
| 24K सोना (प्रति 10 ग्राम) | ₹1,54,400 | ₹1,62,360 – ₹1,62,438 | +₹7,960 से +₹8,000 |
| 22K सोना (प्रति 10 ग्राम) | ₹1,41,500 | ₹1,48,800 – ₹1,49,650 | +₹7,300 |
| चांदी (प्रति 1 किलोग्राम) | ₹2,35,000 | ₹2,45,000 – ₹2,48,120 | +₹10,000 से +₹10,670 |
सर्राफा बाजार में अचानक क्यों आई इतनी बड़ी तेजी?
कमोडिटी और वित्तीय बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी में आए इस तीव्र उछाल के पीछे प्रमुख वैश्विक और आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं:
- अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में कमजोरी और यूएस ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के चलते गैर-ब्याज वाली संपत्तियों (Non-Yielding Assets) जैसे सोने की मांग में वैश्विक स्तर पर जबरदस्त इजाफा हुआ है।
- अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड बायबैक योजना: अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा लॉन्ग-डेटेड बॉन्ड बायबैक को दोगुना करने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुद्रा अवमूल्यन (Currency Debasement) की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे निवेशकों ने तेजी से बुलियन का रुख किया है।
- भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की चाल: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण वैश्विक निवेशक पोर्टफोलियो हेजिंग के लिए सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
- केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की भारी खरीद: दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंक (Central Banks) लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में फिजिकल गोल्ड की मांग मजबूत बनी हुई है।
- चांदी की मजबूत औद्योगिक खपत: ग्रीन एनर्जी, सोलर पैनल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की भारी इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण सफेद धातु में सट्टेबाजी और निवेश दोनों बढ़े हैं।
खुदरा खरीदारों और निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
- हॉलमार्किंग की जांच: सोने के आभूषण खरीदते समय 6 अंकों वाले HUID (Hallmark Unique Identification) कोड की जांच अनिवार्य रूप से करें।
- मेकिंग चार्ज और टैक्स: जेवरात की अंतिम कीमत में 3% जीएसटी और मेकिंग चार्ज शामिल होता है, इसलिए खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स से तुलना करना समझदारी होगी।
- डिजिटल गोल्ड व ईटीएफ: यदि आपका उद्देश्य केवल निवेश है, तो फिजिकल गोल्ड के बजाय गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जहां स्टोरेज और मेकिंग चार्ज का खर्च नहीं होता।
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