रामलला की नगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति के रंग में सराबोर है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अयोध्या दौरे के दौरान न केवल रामलला के दर्शन किए, बल्कि मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाने के लिए आयोजित विशेष अनुष्ठान ‘श्री राम यंत्र स्थापना’ में भी मुख्य यजमान के रूप में शिरकत की। यह यंत्र मंदिर के गर्भगृह के पास एक विशेष स्थान पर स्थापित किया गया है, जिसे वास्तु और शास्त्र के अनुसार अत्यंत शुभ माना जाता है।
राष्ट्रपति का अयोध्या दौरा: मुख्य आकर्षण
श्री राम यंत्र की स्थापना: राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सोने और तांबे से बने पवित्र ‘श्री राम यंत्र’ को स्थापित किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यंत्र सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक है और मंदिर की ऊर्जा को केंद्रित करता है।
रामलला के दर्शन और आरती: राष्ट्रपति मुर्मू ने रामलला की मूर्ति के सामने दंडवत प्रणाम किया और सरयू जल से अभिषेक के बाद दिव्य आरती में भाग लिया। इस दौरान राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
हनुमानगढ़ी में हाजिरी: राम मंदिर जाने से पहले राष्ट्रपति ने परंपरा के अनुसार हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन किए और संकटमोचन हनुमान जी का आशीर्वाद लिया।
क्या है ‘श्री राम यंत्र’ का महत्व?
शास्त्रों के अनुसार, यंत्र किसी भी देवता की ऊर्जा का ज्यामितीय रूप (Geometric Form) होता है।
ऊर्जा का केंद्र: श्री राम यंत्र की स्थापना से मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
वास्तु दोष निवारण: यह यंत्र मंदिर की संरचना को आध्यात्मिक रूप से पूर्ण बनाता है और आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कल्याणकारी माना जाता है।
अखंड सौभाग्य: ऐसी मान्यता है कि इस यंत्र के दर्शन मात्र से ही मानसिक तनाव दूर होता है और कार्य सिद्ध होते हैं।
ट्रस्ट की ओर से विशेष भेंट
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के चंपत राय और अन्य सदस्यों ने राष्ट्रपति को राम मंदिर का एक सुंदर मॉडल और स्मृति चिन्ह भेंट किया। राष्ट्रपति ने मंदिर के निर्माण कार्य की प्रगति और नक्काशी की बारीकियों को भी करीब से देखा और कारीगरों के कौशल की सराहना की।
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