खबर बिहार के गोपालगंज जिले की है जहंा जिले के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। मामला थावे थाना क्षेत्र के चौराव गांव की रहने वाली आफिया परवीन की मौत से जुड़ा हुआ है। महिला की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने सुमन हॉस्पिटल के सामने शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मिली जानकारी के अनुसार, मृतका आफिया परवीन पिछले करीब 9 महीनों से बंजारी स्थित सुमन हॉस्पिटल में ही इलाज करा रही थी। परिवार का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और दवाइयां इसी अस्पताल से चल रही थीं और डॉक्टर लगातार सब कुछ सामान्य बता रहे थे।
परिजनों के मुताबिक, 11 तारीख को आफिया परवीन की डिलीवरी के लिए ऑपरेशन की तारीख तय की गई थी। मृतका के भाई फैज राजा ने बताया कि सभी रिपोर्ट सामान्य थीं और डॉक्टरों ने किसी तरह की जटिलता की बात नहीं कही थी। 11 तारीख को शाम करीब 5 बजकर 32 मिनट पर आफिया का ऑपरेशन किया गया।
ऑपरेशन के बाद ही महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद आफिया को लगातार ब्लीडिंग हो रही थी और उसकी हालत तेजी से खराब हो रही थी। इतना ही नहीं, परिवार के मुताबिक ऑपरेशन के बाद महिला को पेशाब भी नहीं हो रहा था और दर्द भी लगातार बढ़ता जा रहा था।
फैज राजा का कहना है कि रात करीब 2ः30 बजे अस्पताल की ओर से अचानक कहा गया कि मरीज को तुरंत ब्लड की जरूरत है। परिजन आनन-फानन में ब्लड का इंतजाम करने में लग गए। इसी दौरान, परिवार का आरोप है कि डॉक्टर ने बिना सही जानकारी दिए और बिना परिजनों की अनुमति के महिला का दोबारा ऑपरेशन कर दिया।
परिजनों का कहना है कि दूसरे ऑपरेशन के बाद भी महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। ब्लीडिंग लगातार जारी रही और दर्द भी कम नहीं हुआ। इसके बाद परिवार ने डॉक्टर से मरीज को किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की मांग की।
मृतका के भाई ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने डॉक्टर से रेफर करने की बात कही तो डॉक्टर ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने कहा कि “मैं एमबीबीएस डॉक्टर हूं, मुझे पता है क्या करना है।” परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डांटकर चुप कराने की कोशिश की।
फैज राजा के अनुसार, जब परिवार के लोग बार-बार मरीज को रेफर करने की मांग करने लगे तो अस्पताल में मौजूद कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट भी की और अस्पताल का गेट बंद कर दिया गया। हालांकि किसी तरह परिवार के लोग महिला को वहां से लेकर निकले और तुरंत गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
गोरखपुर के रचित हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर हालत देखकर परिजनों को बताया कि महिला के बचने की संभावना बेहद कम है। डॉक्टरों ने कहा कि मरीज की हालत बहुत नाजुक है और लगातार खून बहने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है।
काफी कोशिशों के बावजूद आखिरकार शुक्रवार शाम करीब 3 बजे आफिया परवीन ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई।
इसके बाद आक्रोशित परिजन शव लेकर वापस गोपालगंज पहुंचे और सुमन हॉस्पिटल के सामने रखकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया।
परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते मरीज को किसी बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। उनका आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और गलत इलाज की वजह से आफिया की मौत हुई है।
वही घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराने की कोशिश की। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर पहली बार ऑपरेशन किया गया था तो फिर थोड़े ही समय में दोबारा ऑपरेशन क्यों करना पड़ा। साथ ही यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि जब मरीज की हालत बिगड़ रही थी तो उसे समय पर बड़े अस्पताल में रेफर क्यों नहीं किया गया।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज है और लोग स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। अब सबकी नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है।
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