बिहार में बचपन का दुश्मन कौन? हर साल गायब हो रहे 4000 बच्चे, पुलिस को मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क का शक

Live News 24x7
3 Min Read

बिहार में मासूम बच्चों की गुमशुदगी के आंकड़ों ने राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय की नींद उड़ा दी है। ताजा सरकारी आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार में हर साल औसतन 3,000 से 4,000 बच्चे ऐसे हैं जिनका कोई सुराग नहीं मिल पाता। पुलिस को अंदेशा है कि ये बच्चे किसी सामान्य गुमशुदगी का नहीं, बल्कि संगठित ह्यूमन ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) के जाल में फंस रहे हैं।

2025 का खौफनाक आंकड़ा: 14 हजार से ज्यादा मामले

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अकेले साल 2025 में बिहार भर में बच्चों की गुमशुदगी के कुल 14,699 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से पुलिस अब तक लगभग 7,772 बच्चों को बरामद करने में सफल रही है, लेकिन 6,927 बच्चे अब भी लापता हैं। पिछले कुछ वर्षों का औसत देखें तो हर साल करीब 4,000 बच्चों की फाइलें बंद नहीं हो पातीं, जो एक गंभीर सामाजिक संकट की ओर इशारा करता है।

कहाँ गायब हो रहे हैं ये मासूम?

पुलिस और समाजसेवियों की जांच में मानव तस्करी के पीछे ये तीन मुख्य कारण सामने आए हैं:

बाल श्रम (Child Labour): बच्चों को दूसरे राज्यों (जैसे राजस्थान, दिल्ली, गुजरात) की फैक्ट्रियों में बंधुआ मजदूरी के लिए भेजा जा रहा है।

ऑर्केस्ट्रा और शोषण: नाबालिग लड़कियों को बिहार के ‘ऑर्केस्ट्रा कल्चर’ और फिर अनैतिक देह व्यापार के धंधे में धकेला जा रहा है।

भिक्षावृत्ति और गोद लेना: छोटे बच्चों को बड़े शहरों में भीख मांगने के गिरोहों या अवैध गोद लेने वाले सिंडिकेट को बेच दिया जाता है।

बिहार पुलिस का एक्शन: 44 एंटी-ट्रैफिकिंग यूनिट्स

बढ़ते मामलों को देखते हुए बिहार पुलिस ने कमर कस ली है:

AHTU की तैनाती: राज्य के सभी जिलों और रेलवे स्टेशनों सहित 44 मानव तस्करी विरोधी इकाइयां (AHTU) सक्रिय कर दी गई हैं।

मिशन वात्सल्य: 1,196 थानों को ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल से जोड़ा गया है, ताकि लापता बच्चों का डेटा रियल-टाइम में ट्रैक किया जा सके।

सीमा पर चौकसी: नेपाल और उत्तर प्रदेश से सटे जिलों में सघन चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं।

एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों में भी बिहार, मानव तस्करी के मामलों में देश के शीर्ष राज्यों (तेलंगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा के साथ) में शामिल है। प्रशासन अब जनता से अपील कर रहा है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत ‘डायल 112’ पर दें और सोशल मीडिया पर फैलने वाली ‘बच्चा चोरी’ की अफवाहों से बचें।

41
Share This Article
Leave a review

Leave a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *