ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। वॉशिंगटन द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक और सैन्य प्रतिबंधों के बावजूद, तेहरान की सैन्य शक्ति कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालिया रिपोर्ट्स में ईरान के एक ऐसे ‘सीक्रेट वेपन’ और रणनीति का खुलासा हुआ है, जिसने अमेरिकी इंटेलिजेंस की नींद उड़ा दी है। आइए जानते हैं कि ईरान कैसे प्रतिबंधों को धता बताकर अपनी मिसाइल तकनीक को धार दे रहा है।
प्रतिबंध बेअसर! ईरान का ‘शैडो नेटवर्क’ और गुप्त तकनीक
ईरान ने दशकों से जारी अमेरिकी पाबंदियों से बचने के लिए एक विशाल ‘अंडरग्राउंड नेटवर्क’ तैयार किया है। इसे ईरान का ‘सीक्रेट वेपन’ माना जा रहा है। यह केवल एक हथियार नहीं, बल्कि एक जटिल सप्लाई चेन है जो दुनिया भर से मिसाइल पुर्जे और आधुनिक तकनीक हासिल करने में मदद करती है। इसी तकनीक के दम पर ईरान ने ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर ली हैं, जो सीधे अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं।
मिसाइल सिटीज: जमीन के नीचे छिपा ईरान का घातक जखीरा
ईरान ने अपनी मिसाइलों और ड्रोन्स को रखने के लिए पहाड़ों के नीचे और जमीन की गहराई में ‘मिसाइल सिटीज’ बनाई हैं। ये ठिकाने इतने सुरक्षित हैं कि आधुनिक बंकर-बस्टर बम भी इनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। यहाँ से मिसाइलें दागने के लिए ऑटोमैटिक लॉन्चिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जो पलक झपकते ही दुश्मन पर कहर बरपा सकता है।
रूस और उत्तर कोरिया के साथ ‘डेंजरस नेक्सस’?
पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान को रूस और उत्तर कोरिया से गुप्त रूप से तकनीकी सहायता मिल रही है। हाल के यूक्रेन युद्ध में ईरानी ड्रोन्स के इस्तेमाल ने यह साबित कर दिया है कि ईरान की तकनीक अब केवल रक्षात्मक नहीं रही। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ईरान अब अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता (Range) और सटीकता (Accuracy) को लगातार बढ़ा रहा है।
क्या युद्ध की ओर बढ़ रहा है मध्य पूर्व?
ईरान का दावा है कि उसका हथियार कार्यक्रम पूरी तरह से ‘आत्मरक्षा’ के लिए है, लेकिन अमेरिका और इजरायल इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं। ‘लेमोआ’ जैसे समझौतों और क्षेत्रीय गठबंधनों के बीच, ईरान की यह गुप्त तैयारी किसी भी समय एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की चिंगारी भड़का सकती है।
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