गाजियाबाद के लोनी में 27 फरवरी 2026 की सुबह हुए इस हमले ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया था। सलीम वास्तिक, जो सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक धार्मिक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं, पर उनके दफ्तर में घुसकर दो हमलावरों ने जानलेवा हमला किया था। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद यूपी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न्याय किया है।
सलीम वास्तिक हेल्थ अपडेट: कैसी है अब हालत?
ताजा जानकारी के अनुसार, सलीम वास्तिक का इलाज मैक्स हॉस्पिटल (Max Hospital) में चल रहा है।
सुधार के संकेत: डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत अब पहले से बेहतर है। उनके किडनी और लंग्स (फेफड़े) सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
गंभीर चोटें: हमले के दौरान हमलावरों ने उनका गला रेतने की कोशिश की थी और पेट में कई बार चाकू मारे थे।
मेडिकल जांच: फिलहाल उनके ब्रेन (दिमाग) की MRI और अन्य जरूरी जांचें की गई हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है।
सगे भाइयों का खौफनाक अंत: दोनों हमलावर ढेर
पुलिस ने इस मामले में शामिल दोनों मुख्य हमलावरों को अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया है:
जीशान (Zeeshan): 1 मार्च 2026 को गाजियाबाद पुलिस के साथ मुठभेड़ में जीशान मारा गया। उस पर 1 लाख रुपये का इनाम था।
गुलफाम (Gulfam): फरार चल रहा दूसरा भाई गुलफाम भी 3 मार्च की रात इंदिरापुरम इलाके में हुए एनकाउंटर में ढेर हो गया। पुलिस की जवाबी फायरिंग में वह गंभीर रूप से घायल हुआ था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
पाकिस्तानी कनेक्शन और ‘मुस्लिम आर्मी’ का खुलासा
पुलिस जांच में इस हमले के पीछे एक गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का पता चला है:
पाकिस्तानी उकसावा: जांच में सामने आया कि ये दोनों भाई एक पाकिस्तानी यूट्यूबर के उकसावे में थे। सलीम वास्तिक द्वारा ‘हलाला’ और अन्य कुरीतियों पर दिए गए बयानों से कट्टरपंथी नाराज थे।
टेलीग्राम ग्रुप: जीशान एक कट्टरपंथी टेलीग्राम ग्रुप ‘मुस्लिम आर्मी’ से जुड़ा था, जिसके करीब 18,200 सदस्य हैं। हमले के तुरंत बाद वारदात का वीडियो इस ग्रुप पर डाला गया था।
सुनियोजित साजिश: हमलावरों ने बात करने के बहाने दफ्तर में प्रवेश किया और ‘गुस्ताखी’ का बदला लेने के नाम पर उन पर हमला किया।
AIMIM नेता और अन्य पर भी शिकंजा
सलीम के बेटे उस्मान की तहरीर पर पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें एक स्थानीय AIMIM नेता अजगर, भाटी बिल्डर और अन्य शामिल हैं। पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि क्या इन लोगों ने हमलावरों को स्थानीय स्तर पर मदद पहुँचाई थी।
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