अशोक वर्मा
मोतिहारी : नगर के मिशन चौक मोहल्ला निवासी एवं छतौनी चर्च के पूर्व पास्टर डॉक्टर प्रेम कुमार स्टीफन जो विगत 50 वर्षों से कुष्ठ रोगियों की सेवा में लगे हुए हैं ,उनके सेवा कार्यों का मूल्यांकन करते हुए क्रिश्चियन पीस मिशन दिल्ली द्वारा 2026 मदर टेरेसा नेशनल एक्सीलेंट अवार्ड के लिए चयन किया गया ।डॉक्टर स्टीफन ने बताया कि संस्था द्वारा प्रति वर्ष यह राष्ट्रीय सम्मान दिया जाता है। चंद माह पूर्व मेरा बायोडाटा मांगा गया और मेरे सेवा कार्यों को देखते हुए कमेटी द्वारा मेरे नाम पर सहमति बनी है और अंतिम सिलेक्शन होने के बाद मेरे यहां सम्मानित करने के लिए निमंत्रण पत्र आया है। उन्होंने कहा कि जीवन में सम्मान होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन मेरे पिता और माता से जो सेवा का मुझे संस्कार मिला है उस संस्कार के बदौलत ही मैं कुष्ठ रोगियों के लिए सेवा कार्य कर रहा हूं ।मेरे मां पिता भी कुष्ठ रोगियों की सेवा करते रहे हैं। यद्यपि मेरे परिवार में किसी को कुष्ठ रोग नहीं हुआ लेकिन मानवीय संवेदना के आधार पर मेरा पूरा परिवार इस सेवा कार्य मे लगा हुआ है ।मेरे तीन भाई भी कुष्ठ रोगियों की सेवा में तत्पर रहते हैं और विभिन्न जगहों पर उनकी सेवा जारी है।उन्होंने डॉक्टर की डिग्री पर बताया कि गांधी मेमोरियल लेप्रोसी फाउंडेशन वारधा में मैं 1990 में मेडिकल सेवा के लिए डिग्री प्राप्त किया । गौरतलब है कि डॉक्टर प्रेम स्टीफन एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व के है छतौनी मिशन चौक पर 1903 में स्थापित चर्च मे पास्टर रह चुके और उनके कार्यकाल में चर्च के प्रति आम लोगो में रुझान बढ़ा है तथा मोतिहारी के सबसे पुराने उस चर्च के विभिन्न प्रोग्राम में न सिर्फ क्रिश्चियन धर्म के लोगों की भागीदारी होती है बल्कि अन्य धर्म वर्ग के लोगों की भी भागीदारी होती है ।धर्म परिवर्तन के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में जो प्रावधान है उस अनुसार जिसे जहां जाने की इच्छा हो जाते हैं लेकिन सभी धर्मो में आपसी प्रेम, भाईचारा और मोहब्बत की बातें बताई गई है। वैसे जो जिस धर्म में है वह उस धर्म में रहकर परमात्मा से संबंध बना सकता हैं इसके लिए धर्म बदलने की कोई जरूरत नहीं। उनसे जब पूछा गया कि ऐसी चर्चा होती है कि क्रिश्चियन लोग धनराशि बांट कर धर्म परिवर्तन कराते हैं ,उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं होती है। इस प्रश्न पर डॉक्टर स्टीफन ने कहा कि यह सब काल्पनिक बातें हैं और इस संस्था द्वारा धन बांटने की जो बातें होती तो वह सब काल्पनिक है।मैं अपने घर का खर्च गाय पोसकर तथा दूध से बिक्री से चलाता हूं और परमात्मा के इस सेवा कार्य को कर रहा हूं। मैं बिल्कुल साधारण जीवन जीता हूं इसलिए यह सब बातें काल्पनिक हैं ।वैसे जिसको जहां जाना है जाते आते रहते हैं। यह कोई विषय हम लोगो के लिए नहीं है। हम लोग सिर्फ सेवा कर रहे हैं क्योंकि सेवा ही धर्म है
3