बिहार में विकास के मुंह पर तमाचा : चचरी पुल बना ग्रामीणों का सहारा, चंदा इक्ठ्ठा कर ग्रामीणों ने बनाया पुल

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बिहार में विकास की रफ्तार कितनी तेज है यह दिखाने के लिए यह तस्वीर ही काफी है कहने को तो हम चांद और मंगल तक पहुच गए है लेकिन बिहार का एक क्षेत्र एैसा भी है जिंदगी अभी भी चचरी पुल के सहारे पर टीका हुआ हैै।

आपको बता दे कि 21वीं सदी में जब दुनिया डिजिटल हो रही है तो वही बिहार के बेतिया जिले के मझौलिया प्रखंड में विकास की रफ्तार बांस पर टिकी है. कदमवा घाट पर बना चचरी पुल न केवल सरकारी उदासीनता की कहानी कहता है, बल्कि ग्रामीणों के आपसी सहयोग की मिसाल भी है. सरकार जहां बड़े-बड़े विकास कार्यों की बात करती है, वहीं ग्रामीण आज भी एक पीपा पुल या पक्का पुल के लिए गुहार लगा रहे हैं. यह पुल न सिर्फ आवागमन का साधन है, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को भी उजागर करता है.

हर साल ग्रामीण करीब 3 लाख रुपये जुटाते हैं और मेहनत से पुल बनाते हैं. विडंबना देखिए, जनता के चंदे से बने पुल का उद्घाटन विधायक जी फीता काटकर करते हैं.कदमवा घाट पर बना यह चचरी पुल पूरी तरह ग्रामीणों के सहयोग से तैयार होता है. आधा दर्जन गांवों के लोग हर साल करीब तीऩ लाख रुपये चंदा इकट्ठा करते हैं और हर घर से एक बांस लिया जाता है. इसके बाद पुल का निर्माण किया जाता है. इस बार पुल के उद्घाटन के दिन इसे गुब्बारों से सजाया गया और सिकटा के जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने फीता काटकर आवागमन की शुरुआत कराई.

वही आपको बता दे कि बरसात के 5 महीने यह इलाका मुख्यधारा से कट जाता है. नाव ही एकमात्र सहारा बचती है, जो बीमारों और गर्भवती महिलाओं के लिए काल साबित हो सकती है. बच्चे जान जोखिम में डालकर नाव से स्कूल जाते हैं. ऐसे में हर साल बाढ़ के बाद फिर से चंदा जुटाकर पुल बनाया जाता है.

ग्रामीणों ने बताया कि कदमवा घाट पर पक्के पुल का अभाव वर्षों पुरानी समस्या है। स्थिति यह है कि हर वर्ष लगभग छठी बार केवल बांस के सहारे चचरी पुल बनाकर लोग किसी तरह नदी पार करते आ रहे हैं। दो प्रखंडों और दो विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह घाट बरसात के दिनों में बेहद खतरनाक हो जाता है, जिससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार प्रशासन से यहां पक्के पुल के निर्माण की मांग की गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।

अंततः ग्रामीणों ने खुद जिम्मेदारी संभाली और आपसी चंदा जुटाकर तथा बांस की व्यवस्था कर चचरी पुल का निर्माण कराया। कदमवा एवं सोनबरसा निवासी गुड्डू ओझा, आलोक ओझा, चंद्रमोहन ओझा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि लगभग तीन लाख रुपये की लागत और करीब चार हजार बांस के उपयोग से इस पुल का निर्माण किया गया है। इस पुल से सतगड़ही, गाद बहुअरी, सोनबरसा, खाप टोला, सरिसवा समेत दोनों प्रखंडों के हजारों लोगों का प्रतिदिन आवागमन आसान हो गया है। विशेषकर बच्चों के लिए स्कूल जाना अब सुरक्षित और सुगम बन सका है।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सिकटा विधायक समृद्ध वर्मा ने ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि यह चचरी पुल ग्रामीणों की एकता, परिश्रम और सामूहिक प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि अगले विधानसभा चुनाव से पूर्व कदमवा घाट पर पक्के पुल का निर्माण कराया जाए। विधायक के इस आश्वासन से ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है और लोग जल्द स्थायी पुल निर्माण की राह देखने लगे हैं।

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