अशोक वर्मा
देश में किसी खास आईडियोलॉजी या विचारधारा का पक्ष लेने वाले लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय संस्कृति का आधार क्या है? इस बात को भी नहीं भूलना है कि भारत अविनाशी खंड है और सारे विश्व का विस्तार भारत खंड से ही हुआ है । भारत को वसुदेव कुटुंबकम वाला देश कहा जाता है, देवभूमि कहा जाता है और इसके उदाहरण भी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बराबर देखने को मिल जाता है। इधर चंद बर्षो से भारत मे हिंदू राष्ट्र ,कांग्रेस विहीन राष्ट्र,अंर विपक्ष विहीन राष्ट्र का नारा दिया जा रहा है। अलगाववाद एवं संकीर्ण मानसिकता वालो के लिए यह नारा बहुत खूबसूरत है करण प्रिय है लेकिन क्या यह संभव है ?कदापी नही भारत जैसे देश में यह कहीं से भी संभव नहीं है क्योंकि यहां रावण हुए , सबरी हुई, केवट हुए शुद्र भी हुए और विभिषण भी हुये और सब एक साथ चले। जिस रामराज्य की बात करते हैं उसी देश मे एक धोबी की बात पर श्री राम ने सीता की अग्नि परीक्षा ली। भारत के इस वास्तविक स्वरूप को नहीं भूलना चाहिए । इस आलेख मे मै वाल्मीकि की भूमि चंपारण की धरती की दो घटनाओं का जिक्र करना चाहता हूं जो अलगाववादियों के मुंह पर एक तरफ तो करारा तमाचा है तो दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति के मूल स्वरूप को दर्शाता है ।यह समाचार वसुदेव कुटुंबकम एवं गंगा जमुनी संस्कृति का एक जीवंत उदाहरण के रूप में हमारा दिशा निर्देश करता है। पहली घटना है जिले के केसरिया के पास कैथवलिया गांव की जहां विश्व का सबसे बड़ा मंदिर निर्माण हो रहा है। मंदिरके लिए 120 एकड़ जमीन की व्यवस्था हुई है,वहा स्थापित होने के लिए विश्व का सबसे बडा शिवलिंग भी वहां पहूच चुका है। उस मंदिर निर्माण हेतु अन्य लोगो के साथ 8 एकड़ जमीन एक मुस्लिम भाई ने स्वेच्छा से उस विराट रामायण मंदिर के लिए दान में दी है। इस समाचार को मीडिया ने बहुत प्रमुखता से नहीं लिया क्योंकि यह दिल को जोड़ने वाला समाचार है, नफरत वाला समाचार नहीं है और अखबारों में हिंसा नफरत वाले समाचार के पाठक अधिक होते हैं इसलिए इसे प्रमुखता नहीं दी गई। दूसरी घटना है नगर के भवानी पुर जीरात स्थित मस्जिद में जुम्मे की नमाज अदा करने के बाद दो हिंदू भाइ जो बीमारी अवस्था में महीनो से बिछावन पर पड़े हुए हैं ,के सलामती एवं स्वस्थ होने के लिए दुआ मांगी गई ।सामूहिक दुआ की बजापते माइक से घोषणा हुई और लोगों ने इस दृश्य को को सुना देखा और काफी खुश भी हुए । जहां आज देश में हिंदू मुस्लिम की बातें बहुत जोर पकड़ती जा रही है वैसे दौर में दो हिंदू भाइयों के जीवन सुरक्षा की कामना सामूहिक रूप से मस्जिद में नमाजी भाइयों ने की। यह दो घटना दिल को छूने वाली है और मंथन करने वाली है कि कैसे आज भी भारत मे विभिन्न धर्मावलंबी अपनी मूल संस्कृति को नही छोड़े है,शायद यह कहीं से भी संभव नहीं है क्योंकि भारत एक ऐसी बगिया है जिसमें हर जाति धर्म के रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हैं ,किसी भी एक फूल को निकालने की कल्पना उस बगिया की खुबशुरती छीनने सामान होगी और देश की मूल संस्कृति को नष्ट करने समान होती है। किसी भी नेचुरल विधि विधान में अगर दखलअंदाजी होती है तो वह विस्फोटक रूप लेती है और उसका परिणाम घातक होता है। इसका उदाहरण लोगों ने देखा है कि नदी की धार को जब भी वैज्ञानिक तरीके से मोडा गया है,पहाड़ियों को काटा गया है उसका परिणाम घातक और भयावह हुआ है। पूर्वी चंपारण की यह दो घटना देश के के गणमान्य लोगों के साथ बुद्धिजीवों के लिए चिंतन मनन का विषय है। क्या इस देश को एक धर्म एक विचारधारा वाला देश कभी बनाया जा सकता है? राष्ट्रवाद सर्वोपरि रहे लेकिन बसुधैव कुटुंबकम रूपि इसकी आत्मा को बचाकर रखा जाय। देश की नदी पहाड़ और जंगल कहीं से भी हमें संकीर्णता का संदेश नहीं देता हैं,वह हमें व्यापक स्वरूप का संदेश दे रहा हैं। भारतीय संस्कृति ही भारत का अपना मजबूत सुरक्षा घेरा है।भारत ने सभी धर्म जाति और वर्ग को भारत ने दिल में बसाया है ।यह ऐसा देश है जहां रामायण मंदिर के लिए मुस्लिम भाई आगे बढ़कर करोड़ो करोड़ रूपये की जमीन स्वेच्छा से दान करता है ।देश के मस्जिद में बीमार हिंदू भाइयों के सलामती और और निरोग होने के लिए दुआ मांगी जाती है। क्या यह देश अटूट प्रेम और आपसी भाइचारा को कभी छोड सकता है? आज इस विषय पर चिंतन मनन की विशेष जरूरत है ।आज भारत की भूमि हम सभी की जन्म भूमि है ,यह हमारे लिए गर्व की बात हैं ।हम आज इस महान भूमि पर रह रहे है कल नहीं रहेंगे, हमारे पूर्वज आए और चले गए,लेकिन भारत है और हमेशा रहेगा। भारत वरदान और देव भूमि है।यह अविनाशी खंड है।विश्व का विनाश हो जायेगा लेकिन भारत हमेशा की तरह अविनाशी रहेगा।इसका मूल कारण है कि यह भूमि परमात्मा की अवतरण भूमि है।इतिहास में गलतियां हुई है हम उन गलतियों से सबक लें लेकिन प्रेम और संवेदना से कहीं भी समझौता नहीं हो सकता है ,कोई चाह के भी इसे छीन नही सकता है। क्योंकि ऊपर वाले ने भारत को गिफ्ट के रूप में इतना बडा विशाल हृदय दिया है जिसमे सारी दुनिया समा सकती है। भारत की यही असली पूंजी है इसी के कारण भारत विश्व गुरू कहलाता है।
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