मोतिहारी,
अशोक वर्मा
जिला प्रशासन द्वारा मोतिहारी मैं वृद्धा आश्रम की स्थापना करना एक प्रशंसनीय कदम है लेकिन वैसे औलादो के लिए एक करारा तमाचा है जिनकी उपेक्षापूर्ण रवैये से मां बाप को वृद्धा आश्रम मे शरण लेनी पडती है।उक्त बाते नगर की वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जेपी सेनानी ममता वर्मा ने कही है।उन्होने कहा है कि मोतिहारी के आश्रम की देख रेख नगर निगम करेगा । हमारे म्युनिसिपल कमिश्नर प्रखर, कुशाग्र हैं,इस वृद्धाश्रम की देख रेख सही ढंग से हो इसका भी वो पूरा ख्याल रखेंगे इसका हमे विश्वास है।साथ हीं मोतिहारी में मातृत्व लाभ अधिनियम की धारा 11(a), के तहत् सभी शैक्षणिक तथा अन्य संस्थानों में शिशुगृह भी खुलने चाहिए।
महिला अधिवक्ता ममता वर्मा ने यह भी कहा कि प्रशासनिक लोगों में कितनी संवेदना होती है सर्व विदित है। वृद्धा आश्रम जो अपने नाम के अनुरूप वृद्ध लोगों का एक तरह से आश्रय स्थल है जो समाज के थके हारे और पारिवारिक उपेक्षा के शिकार लोगो के लिए अंतिम सहारा होता है और वे लोग ही वहां आते हैं और उन्हें सरकारी संरक्षण मिलता है। श्रीमती वर्मा ने यह भी कहा कि जब तक आश्रम में संवेदनशील लोगों की भागीदारी नहीं होगी तब तक बेहतर उम्मीद करना बेमानी होगी कहने की आवश्यकता नहीं कि जिन औलादो को मां बाप पोस पालकर बडा करते है बहुत से औलादो से उन्हे तिरस्कार और उपेक्षा मिलती है।बुढापे मे जहा भावात्मक स्नेह, आदर और निकटता की जरूरत होती है वहा एकांत जीवन जीने की विवशता होती जा रही है ,जो दुखद है। श्रीमती वर्मा ने कहा की वृद्ध आश्रम में भी अगर प्यार स्नेह और अपनापन नहीं मिला तो आश्रम का कोई और औचित्य नहीं होगा और यह तभी संभव है जब सिविल सोसाइटी से या समाज के वैसे लोगों की भागीदारी वहां हो जो समाज के लिए जीते हैं, समाज के दर्द के साथ जीते हैं और संवेदनशील होते हैं ।इसके लिए आवेदन आमंत्रित कर उन लोगों की सेवा लेनी चाहिए। सिटीजन फोरम की शशि कला कुमारी ने कहा कि सरकार के पहल से जिला प्रशासन ने वृद्धाश्रम खोला है, अच्छी बात है। वृद्धा आश्रम बदलते सामाजिक गिरावट का एक आईना है जो नई पीढ़ी मे समाप्त हो रही संवेदना को उजागर करती है। आश्रम अपने उद्देश्य पर तभी सफल होगा जब सच्चे समाजसेवी की देखरेख में आश्रम संचालित होगा।
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