Live News 24×7 के लिए समाचार संपादक नरेंद्र झा।
पूर्वी चंपारण जिला के ढाका विधानसभा के पूर्व भाजपा विधायक इस बार के विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर के बाद मामूली अंतर से हार गए हैं। इनकी हार की जितनी चर्चाएं हुई उससे अधिक अब भाजपा संगठन में बड़े पद पाने की चर्चाएं हो रही है। अटकलें लगाई जा रही है कि उन्हें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने वाली है।
वैसे तो चर्चाएं सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्म पर हो रही है, इसका कहीं से कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं है। वैसे इन अटकलों का एक आधार है,वह है भाजपा के कद्दावर नेता और मोतिहारी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले सांसद राधामोहन सिंह के साथ पूर्व विधायक पवन जायसवाल का साथ होना। दिल्ली में जब सांसद राधामोहन सिंह के साथ पवन जायसवाल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यहां गए।
जैसे ही गृह मंत्री के साथ सांसद श्री सिंह और पूर्व विधायक पवन जायसवाल का फोटो सार्वजनिक हुआ, चर्चाएं शुरू हो गई। अटकलें लगाई जाने लगी। संभावनाएं बताई जाने लगी कि सांसद श्री सिंह की कृपा पूर्व विधायक पर बरस रही है। ऐसे में उम्मीद है कि पवन जायसवाल को कोई बड़ा तोहफा मिलने वाला है। कहीं बात हवा में तैरती रही कि श्री जायसवाल को बिहार प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
किसी अन्य प्लेटफार्म पर कहा जाने लगा कि उन्हें विधानपरिषद या राज्यसभा में भेजने की कवायद की जा रही है। किसी ने उम्मीद जताई कि श्री जायसवाल को किसी आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है।इन अटकलों के बीच ढाका क्षेत्र के भाजपाई एवं समर्थकों ने भी श्री जायसवाल को कहीं न कहीं किसी बड़े ओहदे पर बिठाने की मांग शुरू कर दी। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि शीघ्र ही बेहतर परिणाम मिलने वाले हैं। बहरहाल,इन अटकलों को हवा दी गई इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन एक बात यह सच है कि पूर्व विधायक पवन जायसवाल दमखम वाले नेता हैं।
इनकी पकड़ आम जनता में है। श्री जायसवाल वैश्य समाज के बड़े चेहरे हैं। प्रदेश स्तर पर वैश्य समाज में इनकी स्वीकार्यता है। इसके अतिरिक्त बिहार के युवाओं में भी श्री जायसवाल का काफी क्रेज है। ढाका क्षेत्र में भी लगभग सभी जातियों का इन्हें समर्थन मिलता रहा है। भाजपा में आने से पहले श्री जायसवाल ढाका विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। इस जीत ने यह साबित किया था कि श्री जायसवाल को हर जाति और समुदाय का समर्थन मिलता है। इस बार के विधानसभा चुनाव में इनकी हार हुई है लेकिन वह जीत के बराबर है।
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि पिछले चुनाव से अधिक इस बार इन्हें मत मिला। मतलब की पवन जायसवाल की लोकप्रियता घटी नही।मात्र 178 वोट से चुनाव हारे,वह भी बैलेट वोट से। ईवीएम की गिनती में तो श्री जायसवाल की जीत बता दी गई थी। अटकलें और चर्चाएं जो भी हो लेकिन पवन जायसवाल पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होंगे इसमें संदेह नहीं है। वैसे भीष्म प्रतिज्ञा क्या है यह तो समय बताएगा।
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