अशोक वर्मा
माउंट आबू शांतिवन से बीके ब्रह्माकुमारी के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू में नई सतयुगी दुनियावी संस्कार भरने निमित्त वर्ष भर आध्यात्मिक सशक्तिकरण का कार्यक्रम चलता रहता है ,लेकिन सबसे बड़ा आयोजन अक्टूबर से मार्च माह के बीच “बाबा मिलन “का होता है जिसका आयोजन माह में दो बार होता है। 2017 में बाप दादा के रथ गुलजार दादी के अव्यक्त होने के बाद बाबा सूक्ष्म रूप से निर्धारित तिथि पर डायमंड हॉल में उपस्थित रहते हैं और वहा उपस्थित हजारों भाई बहन साकार बाबा मिलन की अनुभूति करते है।प्राप्ति का बिल्कुल वही नजरा और वही प्रति कंपन दिखाई देता है ।30 नवंबर बाबा मिलन की तिथि है लेकिन उसके पूर्व नॉर्थ ईस्टर्न जोन में उड़ीसा, बंगाल, बिहार ,झारखंड एवं नेपाल के 20000 भाई-बहन पधार चुके हैं और प्रतिदिन तपस्विनी वरिष्ठ भाई बहनो का विभिन्न विषयो पर पावरफुल क्लास चल रहा है ।बिहार और झारखंड की प्रभारी तपस्विनी बीके रानी दीदी का बर्ग भी चला। उनका विषय था “अखंड महादानी एवं अखंड योगी कैसे बने”। बीके रानी दीदी के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए संचालिका बहन ने कहा कि 1947 में पंजाब में जन्मी रानी दीदी 6 वर्ष की उम्र में संस्था मे आई और बाल्यकाल मे ही बाबा के वरदानो से झोली भरी। 1960 में वे संस्था में समर्पित हुई तथा 1973 से मुजफ्फरपुर सब जोन सेवा केंद्र में प्रभारी के रूप में सेवा दे रही है।इनके दृढ संकल्प के बदौलत वैशाली मे 12 एकड मे विशाल रिट्रीट सेंटर बन रहा है जो अब अंतिम चरण मे है।इनके कुशल पालना के बदौलत संस्था का पूरे बिहार और झारखंड में सेवा विस्तार हुआ है। विषय पर संबोधन के पूर्व राजयोगिनी रानी दीदी ने बताया कि जब मैं 6 वर्ष की उम्र में बाबा के छत्रछाया में आई तो बाबा का असीम प्यार दुलार और स्नेह मिला। बाबा मुझसे मुरलियों को भाषण में रूपांतरित करवाते थे और क्लास में उस भाषण को सुनते भी थे। बाबा ने एक बार मुझे ट्रांस में भी भेजा था। 18 माह तक मुझे लगातार बाबा के साथ मधुबन में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।बाबा अपने हाथों से मुझे भोजन खिलाते थे और बाबा मुझसे गीत और कविता भी सुनते थे। बाबा की वाणी मे एक विशेष ओज था।चेहरे और व्यवहार मे प्रेरणादायी संदेश और आध्यात्मिक प्रतिकंपन था। हर समय मुझे उनसे शक्ति मिलने का एहसास होता रहता था। विषय पर बोलते हुए रानी दीदी ने कहा कि बाबा प्रतिदिन हम बच्चों को ज्ञान और गुण संपन्न बना रहे हैं, बाबा ने हमें बताया है कि इन गुणो को जितना अधिक दान करोगे उतना ही महादानी बनोगे। दान में अगर शिथिलता वरतेगे तो वह अखंड दानी नहीं कहलाएगे बल्कि खंडित दानी कहलायेगे और जो खंडित दानी होते हैं द्वापर में उनकी खंडित मूर्ति स्थापित होती है।अभी बाबा बच्चो मे अपार शक्ति भर रहे है,अगर दाता बनेंगे तो देवता कहलायेगे।दीदी जी ने कहा कि जितना गुण दान करेगे उतना ही गुण स्वतः तेजी से बढेगी।उन्होने कहा कि जितना देवता गुण आता जाएगा उतना ही अतीन्द्रिय सुख मिलती जायेगी।महादानी हमेशा बीती को बीदी लगाता है और व्यर्थ को फटकने नही देता।कहा कि जो ब्रह्म वत्स बाबा को फालो किया वह महादानी बन अतीन्द्रिय सुख के झूले मे झूलते रहेगे।दीदी जी ने कहा कि हमेशा अपने मूल स्वरूप की स्मृति मे रहोगे तो महादानी बने रहेगे।लक्ष्य को देखे और प्रत्यक्षता के पार्ट के लिए तैयार रहे।महादानी का चेहरा, चलन, व्यवहार हमेशा बाप समान होगा।
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