सुरसम्राज्ञी लोक गायिका शारदा सिन्हा की जयंती पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

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  • लोक गायिका वंदना सिन्हा एवं रानी सिंह की प्रस्तुति ने किया श्रोताओं को मंत्रमुग्ध
पटना : मैथिली, भोजपुरी और मगही लोकगायन की सुरसम्राज्ञी पद्म विभूषण लोक गायिका शारदा सिन्हा की जयंती के अवसर पर राजधानी पटना के प्रेमचंद रंगशाला में एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा बिहार संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की निदेशक रूबी कुमारी, बिहार संगीत नाटक अकादमी के सचिव मो. आलम, कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ, बिहार भाजपा के संयोजक वरुण कुमार सिंह, जिला कला पदाधिकारी कृति आलोक, लोक गायिका वंदना सिन्हा एवं रानी सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत लोक गायिका रानी सिंह ने शारदा सिन्हा को नमन करते हुए उनके गाए हुए गीतों की प्रस्तुति दी। उन्होंने आठ ही काठ के कोठारिया हो दीनानाथ, अजु सिया जी के अप्टन लगाउ, गांव के अधिकारी बड़का भैया हो, केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव, बाबा दिहले टिकवा से होली हम तेजब जैसे गानों को गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके पश्चात शारदा सिन्हा की बेटी व लोकगायिका वंदना सिन्हा ने जय – जय भैरवी, जगदम्बा घर में दियारा, पटना से वायदा, निमिया के डार मैया, अमवा महुवा के झूमे डलिया जैसे गीतों पर प्रस्तुति देकर सबको झूमने पर मजबूर कर दिया।
दोनों कलाकारों ने शारदा सिन्हा के अमर गीतों और पारंपरिक लोकधुनों को अपनी सुमधुर आवाज़ में प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इसके अतिरिक्त संगत कलाकारों में ढोलक पर पंडित अर्जुन चौधरी, सिंथेसाइजर पर सन्नी कुमार, हारमोनियम पर मो. जानी, पियानो पर ऋषिराज, बैंजो पर सुभाष, बांसुरी  पर मो. सलीम एवं मो. शरफुद्दीन, तबला पर डर. श्याम मोहन ने भी अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और देर रात तक लोकसंगीत की मधुरता में डूबे रहे।
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