अशोक वर्मा
मोतिहारी : जयप्रकाश नारायण छात्र आंदोलन के प्रखर नेता कुमार शिव शंकर जो माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मित्र भी है और जदयू के वरिष्ठ नेता है ,उनके काबिलियत पर उन्हें जदयू विधि प्रकोष्ठ का वरीय प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है ,यह बड़ी खुशी की बात है। 1974 मे जिन मुद्दों को लेकर छात्र आंदोलन हुआ था उसमें एक मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार भी था । वर्तमान समय बिहार भ्रष्टाचार से कराह रहा है एपीपी ,पीपी या किसी भी सरकारी अधिवक्ता की नियुक्ति लंबे समय से पैसे और पैरवी के आधार पर किया जा रहा है। कलेक्ट्रेट से लेकर के विधि न्यायालय की स्थिति से सभी बाकिफ है। किस तरह चढ़ावा चढ़ाया जाता है किस तरह कोर्ट मे पेसकार को पैसा देकर डेट पर डेट लिया जाता है, किस तरह मुकदमा लडने की लंबी जटिल प्रक्रिया है ।किसी प्रकार के कागज का नकल लेने में हजारो हजार रुपए घूस लगता है, तमाम जगहो पर भ्रष्टाचार का खुला नजारा बिहार की जनता देख और भुगत रही है।जेपी सेनानी गैर पेंशनधारी अशोक वर्मा ने बताया कि बिहारवासी उम्मीद करते हैं कि जेपी आंदोलन से निकले वरिष्ठ अधिवक्ता कुमार शिव शंकर को जो नई जिम्मेदारी दी गई है उससे बिहार के न्यायालय सहित सभी कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के सिस्टम को समाप्त किया जा सकता है। कुमार शिव शंकर ने एक बार सुगौली चीनी मिल परिसर में आयोजित एक सभा में उपस्थित नीतीश कुमार को अपने संबोधन के दौरान शिकायत दर्ज कराया था कि बैंक सहित विभिन्न कार्यालयो में घूस लिया जा रहा है नीतीश कुमार ने पलटवार करते हुए उनको कहा था कि शिव शंकर जी आपको घूस लेने वाले का नाम बताना होगा।शिवशंकर जी चूप हो गये और भविष्य मे कभी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ इसलिए नही बोले कि उन्हे अपना जीवन सुरक्षित रखना था।बाद मे वे कुछ भी बोलने से परहेज करने लगे।अभी शिवशंकर जी सरकारी वकील है और चाहें तो सरकारी कार्यालयो से भ्रष्टाचार को जडमूल से समाप्त कर सकते है। जेपी आंदोलन में चंद दिनों के लिए जेल जाने वाले एक सेनानी ने कहा कि हम लोग जब जेल गए थे तो हमें नहीं पता था कि हमारा बेल कौन कराया ।उस समय अधिवक्ता संघर्ष समिति के लोग बेल करा कर जेल से मुक्त कराते थे इस कारण हम लोग चंद दिन ही जेल में रहे जिस कारण आज पेंशन से वंचित हो गए क्योंकि जेपी सेनानी पेंशन के लिए न्यूनतम एक माह जेल में रहने का नियम बनाया गया है इस नियम में भी विरोधाभास है और विसंगति है क्योंकि जो लोग जेपी सेनानी थे तमाम लोगों को भी पेंशन मिलना चाहिए था,हां सेनानी होने का कोई उनका लिंक होना चाहिए। वे अगर एक दिन के लिए भी अगर जेल गए हैं तो उन्हें पेंशन मिलनी चाहिए। जेल से जमानत पर रिहाई हुई थी और जब 1977 में सरकार बदली तब सरकार ने आदोलन संबंधित मुकदमा उठा लिया लेकिन मुकदमा प्रक्रिया कोर्ट मे चल रहा था। 1980 मे कई जेपी आदोलनकारियो के घर कुर्की वारंट आया था।अतः सभी जेपी आंदोलनकारियो को पेंशन मिलनी चाहिए ।उन्होंने कुमार शिव शंकर से मांग की आप एक जेपी सेनानी पेंशनर के साथ सरकारी अधिवक्ता है और अभी प्रदेश के वरीय उपाध्यक्ष बने हैं आप सरकार के पास पेशन से वंचित जेपी सेनानियो को मान सम्मान प्रतिष्ठा के अलावा पेंशन दिलाने की व्यवस्था करवाइए ।यह आपका धर्म भी बनता है।विधि प्रकोष्ठ के वरीय प्रदेश उपाध्यक्ष बनाये जाने पर कुमार शिवशंकर को काफी लोगो ने बधाई दी है।बधाई देने वालो मे राय सुदर देव शर्मा ,नंद पटेल ,प्रो दिनेश चंद्र प्रसाद, दीपक पटेल अधिवक्ता, शोभा सिह,शिवपूजन राउत अधिवक्ता आदि है।
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