हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर प्रभु तारा स्कूल में एक संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन

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पटना सिटी। 13 सितंबर हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर सकरी गली, पटना सिटी स्थित प्रभु तारा स्कूल में एक संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्कूल के बाल कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कृष, सोनाक्षी, पुष्पांजलि, शिक्षा, समृद्ध ,आयांश, खुशी, प्रियांशी, सुहानी, मौसम, सावर्णी ,मोनी, साक्षी,  आदि बाल कवियों की कविताएँ सराही गयीं।
इस अवसर पर डॉ. अविनाश भारती की कविता कहीं जो मुकद्दर का मारा मिला है” तथा श्वेता गजल की कविता “बोलना जिसको सदा मेरे लिए सम्मान है ने अपनी प्रभावी रचनाएँ सुनाईं । गजलकार विजय कुमार की कविता “हाँ दस्तुर यही है जीवन का ने श्रोताओं पर गहरा असर छोड़ा । डॉ. सुनील कुमार उपाध्याय ने भोजपुरी कविता ‘राम के नाम रही रसना पर तथा प्रभात वर्मा ने अपनी मगही कविता प्रस्तुत की। प्रभात कुमार धवन ने अपनी कविता में बच्चों को आँधी तूफान में भी खड़ा रहने का हौसला दिया। ब्रह्मानंद पाण्डेय ने हिंदी दिवस पर ‘हर्षित भाव से मैं हिंदी का अभिनंदन करता हूँ-कविता सुनाई। मनोज कुमार उपाध्याय ने अपनी कविता में रूपये के गिरते मूल्य पर चिंता जताई। युवा रचनाकार अमन आकाश ने हिंदी की प्रगति पर जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री कमल नयन श्रीवास्तव ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी हिंदी को वह स्थान नहीं मिला जो मिलना चाहिए था। अध्यक्षीय भाषण के दौरान उन्होंने सरकारों के उदासीन रवैये को भी रेखांकित किया। केवल हिंदी दिवस पर कार्यक्रम मनाने से हिंदी का विकास नहीं होगा। इसके लिए पूरे साल प्रयत्नशील रहना होगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत की अन्य भाषाओं से हिंदी का कोई विरोध नहीं है, हिंदी तो सभी भारतीय भाषाओं को आपस में जोड़ती है।
कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मानंद पाण्डेय ने किया। अतिथियों का स्वागत प्रधानाचार्य मनोज कुमार उपाध्याय ने किया। आभार ज्ञापन निदेशक मुकेश कुमार ने किया।
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