अशोक वर्मा
मोतिहारी : स्वतंत्रता संग्राम में सेनानियों को विशेष शक्ति और ऊर्जा देने वाला जिला चंपारण कई कारणो से काफी महत्वपूर्ण है ।मुख्य रूप से गुजरात से चलकर महात्मा गांधी ने चंपारण को अपना कर्म भूमि बनाया और यहां के किसानों पर हो रहे अत्याचार दमन और शोषण के विरुद्ध सत्याग्रह चलाया जिसका नाम चंपारण सत्याग्रह पड़ा। आंदोलन का जो स्वरूप उन्होंने दिया वह भारत के लिए सेवा और आंदोलन का मार्ग बन सकता था। लेकिन देश ने सत्य और अहिंसा के मार्ग को अपनाया जरूर लेकिन बापू के सेवा कार्य का अनुसरण नहीं किया। गांधी जी ने उस दौर के ब्रिटिश हुकूमत से बगावत किया और लोहा लिया था जब वह विश्व का सबसे बडा शक्तिशाली राष्ट्र था, कोर्ट में जाकर बापू ने चुनौती पूर्ण बयान भी दिया था ।उन्होने चंपारण में आने का कारण भी बताया था ।कोर्ट में जब उनसे पूछा गया कि आप चंपारण छोड़ दें तो आप पर से मुकदमा उठा लिया जाएगा, इस पर बापू ने कहा था कि आप चंपारण छोड़ने की बात करते हैं अगर मेरा वस तो मैं चंपारण में ही घर बनाकर बस जाऊं। गांधी जी चंपारण वासियो को बहुत प्यार करते थे ,उसका मुख्य कारण था कि चंपारण के गरीबी ,अशिक्षा एवं समस्याओं को देखकर वे बहुत द्रवित हुए थे और चाहते थे कि चंपारण के लोगों का जीवन सुधरे इसलिए उन्होंने चंपारण में बुनियादी पाठशालाये भी खोली और शिक्षा नीति बनाकर जिला प्रशासन को दी ।उन्होंने यहा के किसानों पर हो रहे अत्याचार को सूचीबद्ध कर जिला पदाधिकारी को सौपी थी।उस समय के जिला पदाधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया तथा अनावश्यक लगाए गए टैक्स एवं क्रूर कानून आदि को उठा लिया । चंपारण सत्याग्रह की जीत हुई और उस जीत ने पूरे देश के आंदोलनकारियो के अंदर एक शक्ति भरी।बापू जब चंपारण सत्याग्रह चला रहे थे उस दौर में नगर के मिसकौट मुहल्ला निवासी एक नौजवान सेनानी देवीलाल साह ने बंजरिया पंडाल की अपनी जमीन बापू को दान में दी थी और और उस जमीन में बापू ने 24 मई को अपने हाथों शीला न्यास कर आश्रम की नींव डाली।उस आश्रम का चंपारण सत्याग्रह आंदोलन संचालन में मुख्य भूमिका रही। देश आजाद होने पर वह आश्रम कांग्रेस आश्रम के रूप में तब्दील हो गया। आज भी वह आश्रम नए स्वरूप में चल रहा है । उस आश्रम परिसर में शहीद स्मारक भी बन गया है लेकिन आज आवश्यकता है कि जिस तत्परता लगन श्रद्धा और सम्मान से काग्रेस के वर्तमान जिला अध्यक्ष ई शशिभूषण राय उर्फ गप्पू राय ने आश्रम को नया भव्य स्वरूप दिया है, उसी भाव से चंपारण के शहीदो की मूर्ति अगर बनवा देते है तो यह एक ऐतिहासिक काम होता।स्वतंत्र ता सेनानी उत्तराधिकारी प्रो विजय शंकर पाण्डेय ने कहा कि सच में जिस देश वासियो ने अपने देश के सेनानियों एवं शहीदों को सम्मान और प्रतिष्ठा दी वह देश दिनों दिन आगे बढ़ता गया। आज इस फार्मूले को अपने देश में लागू करने की आवश्यकता है ताकि आज जिस तेजी से मूल्यो का ह्रास हो रहा है वह रुके।अवकाश प्राप्त एम एस कालेज के प्राचार्य डॉक्टर अरूण कुमार ने कहा कि पाठ्यक्रम मे स्वतंत्रता सेनानियो की जीवनी शामिल करना समय की मांग है।उत्तराधिकारी परिवार के जिला अध्यक्ष केके पाठक ने कहा कि जब तक मुल्य आधारित शिक्षा व्यवस्था नही होगी तब तक वेहतर परिणाम नही निकलेगा।
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