मोतिहारी । श्री देवराहा बाबा गुरुकुल आश्रम में चल रहे 54 वे सद्गुरु महायज्ञ में श्री सीताराम जी के विवाह प्रसंग का वर्णन वर्णन करते हुए अयोध्या धाम से पधारे संत छोटे बापूजी महाराज ने कहा कि
गोस्वामी श्री तुल सीदास जी महाराज कहते हैं भगवान श्री राम मुनि विश्वामित्र जी के साथ लक्ष्मण सहित श्री जनकपुर में भगवान शंकर के धनुष का खंडन करके श्री सीता जी का पानी ग्रहण करते हैं मानव जीवन में इसका तात्पर्य यह है सीता भक्ति हैं राम ब्रह्म है
भक्ति का पानी ग्रहण भगवान कब करते हैं जब भक्ति निष्काम कपट अभियान रहित हो ऐसी भक्ति भगवान को प्रिय है जीस भक्ति में कामना हो अभिमान हो वह भक्त भगवान को प्रिय नहीं है
जिस प्रकार से अपने प्रिय जनों को उनके पसंद की चीज देने से उनकी प्रसन्नता हमें प्राप्त होती है इस तरह से भगवान को भगवान के प्रिय वस्तु का अर्पण करना भगवान का कृपा भाजन बनाता है
श्री राम कथा श्रवण करके अपने अंतःकरण की वृत्तियों को पवित्र बनाकर शुद्ध भक्ति से भगवान का वरन करना चाहिए
जब चारों दूल्हा दुल्हन विवाह मंडप पर विराजमान हुए
उन्हें देखकर श्री जनक श्री दशरथ जी दोनों आनंदित हुए
हर युग में श्री राम कथा मानव जीवन के मूल तथ्यों से जुड़ा रहा है आज भी है इस
कलिकाल में थोड़ा विचार करके देखें तो इसकी प्रासंगिकता है मनुष्य दशरथ जी के तरह आनंद की प्राप्ति कैसे कर सकते हैं तो गोस्वामी जी बताते हैं श्री राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न श्री सीता जी मांडवी जी उर्मिला जी श्रुतिकीर्ति जी
इन सब का आध्यात्मिक स्वरूप क्या है
चारों दूल्हा चार फल के समान हैं चार फल इस प्रकार से हैं
धर्म ्अर्थ ्काम ्मोक्ष
चारों दुल्हन इन चार फल की क्रिया यानी कार्य के रूप में है धर्म की क्रिया श्रद्धा है
श्रद्धावन व्यक्ति को धर्म की प्राप्ति होती है
अर्थ की क्रिया सेवा है
जो सेवा करते हैं उन्हें अर्थ की प्राप्ति होती है
काम की क्रिया तपस्या है
तप सभी कामनाओं को पूरा करने वाला है
मोक्ष की क्रिया भक्ति है
भक्ति से मोक्ष की प्राप्ति होती है
धर्म अर्थ काम मोक्ष के साथ जीवन में श्रद्धा सेवा तप और भक्ति का जब आगमन होत है आज के श्री राम कथा का व्यास पूजन इंजीनियर लाल बाबू मिश्रा ने किया ,वहीं छठे दिवस के श्री राम कथा का विधिवत दीप प्रज्वलित कर इनर व्हील क्लब मोतिहारी की अध्यक्ष श्रीमती पुतुल सिन्हा आशा सिंह, अलका सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया, कथा के माध्यम से श्री राम सीता की बारात निकाली गई, मैथिली भजनों के धुन सुनकर भक्त झुमने लगे पूरा आश्रम परिसर विवाह उत्सव को देखकर मन मुग्ध हो गया भक्तों का आपार भीड़ उमड़ा!
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