अशोक वर्मा
मोतिहारी : चैती छठ का पूरे शहर में भक्ति का माहौल चरम पर रहा ,बाजारों में अपेक्षाकृत आज काफी भीड़ देखी गई खरीदारी लोगों ने जमकर की लेकिन छोटे छठ घाटो मे जल की कमी देखी गई। कम पानी के बावजूद घाट पर माताएं बहने जैसे तैसे अर्द्ध दी। वैसे नगर के मुख्य घाट जितने भी हैं सभी मोतीझील के किनारे ही बने हुए हैं वहा पानी की कमी नही थी। घाटों पर उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही लेकिन आस्था का प्रतीक चार दिवसीय छठ पर्व बड़े ही स्वच्छता और पवित्रता के साथ आरंभ हुआ। संध्या का अर्थ भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस वर्ष का चैती छठ मोती झील के किनारे सड़क निर्माण होने के कारण थोड़ा असुविधाजनक रहा क्योंकि आजादी के बाद रोईग क्लब से लेकर मिस कॉट मोहल्ला तक एक नया मुख्य पथ का निर्माण कार्य चल रहा है जिसका आधा भाग मीना बाजार तक संपन्न हो चुका है शेष मिसकौट एरिया में कार्य संपन्नता की ओर है। इस सड़क निर्माण के कारण फिलहाल थोड़ी बहुत परेशानी लोगों को हुई लेकिन कार्तिक छठ के अवसर पर स्थिति सुगम आसान तथा सुविधाजनक हो जाएगी ।नगर के मुख्य छठ घाट मिस्कॉर्ट स्थित कदमघाट एवं वृक्षे स्थान घाट को माना जाता है इसके अलावा साहू घाट रोईग क्लब ,राम घाट,देवरहा बाबा आश्रम घाट ,हनुमान गढी घाट,जानपुल घाट, डॉक्टर स्वस्ती सिन्हा गोपालपुर घाट , बरियारपुर घाट,पतौरा मनरेगा घाट के अलावा शहर में सभी घाटो को बड़े सुंदर ढंग से सजाया गया था। आवागमन के लिए सभी स्थानीय कमेटी ने बड़ा ही सुंदर व्यवस्था किया तथा स्थानीय सभी लोग आपस में मिलकर घाटों को रोशनी से चकाचौध किये रहे । सभी घाट पर पुलिस की व्यवस्था रही ।महिला पुलिस को घाट पर महिलाओं ने सिंदूर लगाकर उनका अभिवादन किया जो बड़ा ही सुंदर और रमणीक नजारा बना रहा। छठ के गीत से पूरा शहर गुंजायमान रहा । छठ गीत का आकर्षण बना रहा, माहौल बड़ा ही सुंदर रहा ।एक वर्ष के अंदर दो छठ का आयोजन होता है ।एक कार्तिक में और दुसरा चैत माह में। कार्तिक माह का छठ बड़े पैमाने पर होता है लेकिन धीरे-धीरे चैती छठ भी बड़ा आकार लेता जा रहा है।जैसे डैसे दुनिया अशांत हो रही है, दुखो और बीमारियो का आलम बढ रहा है वैसे-वैसे लोग भक्ति मार्ग की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे है । छठ मे डूबते और उगते सूर्य को अर्थ दिया जाता है ।उस मौके पर छठ व्रति मन्नत भी मांगते हैं और मन्नत पूरा होने छठ व्रत की अवधि आगे भी बढ़ाते हैं। यह आस्था का पर्व है।
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