अनुमण्डलीय अस्पताल बगहा में परिवार नियोजन के स्थायी व अस्थायी साधनों के बारे में किया जा रहा है जागरूक

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  • लाभुकों को मिलता है संस्थागत प्रसव एवं सिजेरियन सेक्शन का लाभ
  • 24 घंटे उपलब्ध है स्वास्थ्य सुविधाएं 
बेतिया : बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिले के कमलनाथ तिवारी अनुमण्डलीय अस्पताल बगहा में आने वाले महिलाओं को परिवार नियोजन के स्थायी साधन अपनाने हेतु डॉ एवं स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा जागरूक किया जा रहा है वहीं पुरुषो को भी नसबन्दी कराने का सुझाव दिया जाता है। लाभार्थियों को बताया जा रहा है की 2 बच्चों के बीच 3 वर्षो का गैप जरुरी है। सरकारी अस्पताल में परिवार नियोजन कराए जाने पर  सभी प्रकार की मुफ्त सुविधा दी जाती है, बल्कि प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है,जिसमें प्रसव के उपरांत एक सप्ताह के अंदर स्थायी साधन को अपनाने पर 3000 रुपए एवं इसके बाद अपनाने पर 2000  रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जबकि पुरुष नसबंदी कराने पर 3000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है एवं पीपीआईयूसीडी/पीएआईयूसीडी लगाने पर लाभार्थी को 300 और अंतरा लेने पर 100 रुपये प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है ये कहना है कमलनाथ तिवारी अनुमण्डलीय अस्पताल बगहा के उपाधीक्षक डॉ अशोक कुमार तिवारी का, उन्होंने बताया की प्रत्येक महीने 21 तारीख को परिवार नियोजन दिवस के आयोजन पर परिवार नियोजन काउंसलर/स्टॉफ नर्स द्वारा बंधयाकरण के लिए जागरूक किया जाता है वहीं संस्थान में उपलब्ध अस्थायी साधन ( बास्केट ऑफ़ चवाइस )जिनमें  छाया, माला-एन, अंतरा, कॉपर-टी व कंडोम की वितरण भी की जाती है।
लाभुकों को मिलता है संस्थागत प्रसव एवं सिजेरियन का लाभ
अनुमण्डलीय अस्पताल बगहा आने वाले लाभुकों को संस्थागत प्रसव के साथ ही सिजेरियन सेक्शन का लाभ भी मिलता है।डीएस डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने बताया की अनुमण्डलीय अस्पताल बगहा में  सप्ताह में चार दिन – सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार व शनिवार को सिजेरियन ऑपरेशन का लाभ लाभुकों को मिल रहा है।अस्पताल में बच्चों के नियमित टीकाकरण के साथ ही इमरजेंसी ईलाज की सारी सुविधाए निशुल्क उपलब्ध है। यहाँ समय समय पर एनसीडी जाँच हेतु कैंप का भी आयोजन किया जाता है।मौके पर इलाज हेतु आए महिला लाभार्थी ज्योति देवी एवं सुशीला कुमारी ने बताया की पहले इलाज व ऑपरेशन के लिए 65 किलोमीटर दूर बेतिया मेडिकल जाना पड़ता था, जहाँ से आने जाने में काफ़ी परेशानी का सामना पड़ता था,वहीं प्राइवेट में ज्यादा खर्च उठाना पड़ता था, परन्तु अब सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कई प्रकार का जाँच इसी जगह हो जाता है वहीं डॉ द्वारा दवाएं भी मुफ्त में उपलब्ध हो जाती है।
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