फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 15 प्रखंडों में सर्वजन दवा सेवन अभियान

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  • एमडीए/आईडीए से पूर्व तैयारियों पर सीएचओ का हुआ प्रशिक्षण
  • हाथीपांव व हाइड्रोसील रोग की रोकथाम के लिए खिलायी जायेगी दवा
मुजफ्फरपुर: फाइलेरिया को आमभाषा में हाथीपांव कहते हैं। इस रोग के उन्मूलन को लेकर आगामी माह 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन अभियान यानि मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन चलाया जायेगा। यह अभियान जिला के 15 प्रखंडों तथा चार शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में संचालित किया जायेगा। एमडीए/आईडीए अभियान के दौरान लोगों को फाइलेरियारोधी दवा का सेवन कराया जाना है। स्वास्थ्यकर्मी, आशा तथा आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका की टीम लोगों को तीन प्रकार की दवा का सेवन करायेंगी। इसमें  अल्बेंडाजोल, डीईसी और आइवमेक्टिन शामिल है। उम्र और लंबाई के अनुसार दवाओं का सेवन कराया जायेगा। स्वास्थ्यकर्मी लोगों को दवा का सेवन अपने सामने ही करायेंगे। यह बातें सोमवार को एमडीए/आईडीए अभियान से पूर्व हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के कॉम्यूनिटी हेल्थ अफसरों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार ने कही। प्रशिक्षण के पहले दिन बांद्रा, बोचहा, गायघाट, कांटी, कटरा, मुरौल और मोतीपुर प्रखंड के 61 सीएचओ ने हिस्सा लिया। अन्य बचे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के 74 सीएचओ का प्रशिक्षण 28 जनवरी को किया जाना है।
साल में एक बार दवा का सेवन जरूरी:  
डब्लूएचओ की जोनल कॉर्डिनेटर डॉ माधुरी देवराजू ने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को दवा सेवन के तरीकों की जानकारी देते हुए बताया कि हाथीपांव से बचाव के लिए सेवन करायी जाने वाली दवा को लेकर लोगों को जागरूक करें। दवा का सेवन दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा अति गंभीर रोग से ग्रसित लोगों को नहीं करानी है। एमडीए की दवा फाइलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सरकार द्वारा साल में एक बार अभियान चलाकर खिलायी जाती है। नाइट ब्लड सर्वे के दौरान एक प्रतिशत से अधिक माइक्रोफाइलेरिया दर होने पर उन जगहों पर एमडीए अभियान चलाया जाता है। बताया कि दवा का सेवन खाली पेट नहीं कराना है। अल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खानी है। दवा सेवन के बाद यदि किसी को चक्कर या उल्टी आता है तो यह शरीर में माइक्रोफाइलेरिया की मौजूदगी के लक्षण हैं।
साथ ही उन्होंने एमएमडीपी किट के उपयोग और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
फाइलेरियारोधी दवा पूरी तरह सुरक्षित: 
डीपीएम रेहान अशरफ ने कहा कि फाइलेरियारोधी दवा पूरी तरह से सुरक्षित है। आशा या अन्य स्वास्थ्यकर्मी के पास रोग प्रबंधन करने की सभी सामग्री मौजूद रहेगी। बताया कि हाथीपांव रोग क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसके लक्षण पांच से पंद्रह साल बाद भी दिख सकते हैं। पैर, हाथ या अंडकोश में सूजन इसके लक्षण होते हैं। हाथीपांव को लेकर कई भ्रांतियां हैं। लेकिन लोगों को यह जानना चाहिए कि यह रोग क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। और यह रोग किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। ऐसे में दवा सेवन ही एकमात्र बचाव है। साथ ही मच्छरदानी का इस्तेमाल और मच्छर को पनपने से रोकने के लिए साफ-सफाई जरूरी है। उन्होंने सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के दौरान सीएचओ के जिम्मेदारियों पर भी विस्तृत चर्चा की।
मौके पर जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार, डीपीएम रेहान अशरफ, डब्ल्यूएचओ जोनल कोओर्डिनेटर डॉ माधुरी देवराजु, सीफार डीसी नीतू कुमारी, पीरामल पीओ इफ्तेखार अहमद खान, भीबीडीसी राजीव रंजन, भीडीसीओ राकेश कुमार, रौशन कुमार, अभिषेक, बिपिन कुमार सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।
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