डाक्टर राजेंद्र बाबू की जयंती मनाने के बहाने दो कायस्थ संगठन  आमने-सामने

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अशोक वर्मा 

मोतिहारी : मोतिहारी विधानसभा क्षेत्र में कायस्थो की स्थिति  संख्या के हिसाब से संतोषजनक है । इसका वोट निर्णायक साबित होता है ,यह बात दीगर है कि कायस्थो के वोट को एक राजनीतिक दल ने अपने पॉकेट का वोट समझता रहा है जिसका प्रमाण है किशोर तो लेता रहा लेकिन  खंडहर होता सवा सौ वर्ष पुराना मोतिहारी का चित्रगुप्त मंदिर उसे नही दिखा। चित्रांशो का यहां  चित्रगुप्त हॉस्टल है जहां से गरीब कायस्थ परिवार के छात्र पढ़ कर देश के बड़े-बड़े महानगरों में बड़े-बड़े पोस्ट पर आज कार्यरत है ।उस हास्टल की स्थिति काफी दयनीय है। शर्म आती है वहां के नजारे को देखने के बाद ।किसी भी विधायक या सांसद ने हॉस्टल और मंदिर की सुधि नही ली जबकि उनकी प्राथमिकता में यह होना चाहिए था। चित्रगुप्त हॉस्टल और मंदिर की  स्थिति वही हो गई है जो स्थिति चीनी मिल की चाय पीने की घोषणा एक दल द्वारा की गई थी । आज तक चीनी मिल चालू नहीं हुआ और दो मजदूर अपने बकाए वेतन की मांग करते हुए आत्मदाह कर परलोक सिधार गए ।3 दिसंबर देशरत डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की जयंती है और सर्वप्रथम नगर की एक प्रसिद्ध महिला चिकित्सिका  डॉक्टर हेना चंद्रा ने चित्रांश एकता मंच बनाकर कायस्थो को एकजुट करने का बीड़ा उठाया और राजेंद्र बाबू की जयंती के बहाने सभी को एक मंच पर लाने के लिए गांव-गांव मोहल्ले -मोहल्ले भ्रमण कर उन्होंने कायस्थो को एकजुट किया, उनका कोई संगठन नहीं है लेकिन एकमात्र चित्रांश परिवार के लोगों को संगठित करना उनका उद्देश्य था और इसमें बहुत हद तक वे कामयाब दिख रही है।उन्होने तीन दिसंबर को गांधी प्रेक्षागृह मे सुबह 10 बजे जयंती मनाने की घोषणा की।दूसरी ओर 3 दिसंबर को ही दुसरा संगठन चित्रगुप्त महापरिवार एवं राजेंद्र सेवा संस्थान ने भी  राजेंद्र नगर भवन में कार्यक्रम करने की घोषणा कर दी ।इनका भी समय 10:00 बजे ही है जिस समय डॉक्टर हेना चंद्रा ने महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में कार्यक्रम की घोषणा की है। देश में कायस्थ जाति को शिक्षित और बहुत ही कुशाग्र बुद्धि की जाति  माना जाता है ।आज देश के अंदर आईएएस आईपीएस  कायस्थ जाति की संख्या अधिक  है ।केंद्र से लेकर राज्य की सरकारों में मंत्री मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बड़े-बड़े पद पर बैठे हुए लोगों के सलाहकार या पीए  ज्यादातर कायस्थ आफिसर ही है। लेकिन मोतिहारी जैसे शहर में जहा पहले से ही बिखरे टूटे कायस्थ आपसी लड़ाई झगड़े में ही लिप्त है, कायस्थो  का इस तरह से रोल होगा इसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी ।सभी जाति का संगठन है और सभी लोग अपना अपना कार्यक्रम करते हैं लेकिन इस तरह अपना सिर फूटौवल  वाला कार्यक्रम किसी ने नहीं किया होगा। आज कायस्थ  सीधे दो भाग मे बंटे दिख रहे है ।कायस्थ एकता की बातें जयंती के बहाने की जा रही है लेकिन जो सामने दिख रहा है वह तो विश्राम स्वरूप है । इस जाति की अभी और दुर्दशा होना बाकी है।किसी दल ने आजतक कायस्थो को अहमियत नहीं दी ।सभी दलो ने इस जाति को भुनाया है।भाजपा के ललित बाबू,मिथिलेश वर्मा, विनय वर्मा  डाक्टर आशुतोष शरण  उपेक्षित रहे,टिकट नही मिली।महागठबंधन के राजीव कुमार,विनोद श्रीवास्तव,अजय श्रीवास्तव, को महत्व नही दिया गया,एमएलसी तक नही बनाया गया।

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