अशोक वर्मा
मोतिहारी : नगर के पतौरा मे 40 वर्षों मे निर्मित स्वामी आत्म प्रकाशन योग सेवा आश्रम अपने विशेष दिव्यता के कारण चर्चा मे है।देश के आधुनिक मंदिरो मे इस आश्रम का प्रमुख स्थान है। मूर्तियों से निकलती दिव्य आभा के कारण आम लोगों के लिए यह मंदिर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में लगभग 1200 मूर्तिया स्थापित हो चुकी है तथा मंदिर के ऊपरी भाग में अद्भुत मेटल का शिवलिंग ,विघ्न विनाशक गणेश की मूर्ति के अलावा अन्य देवी देवताओं की मेटल की मूर्तियां बनी हुई है जिसे देखने बिहार के अलावा देश के कोने-कोने से लोग आते हैं ।उक्त मंदिर के निचले कक्ष में स्थापित ब्रह्मा बाबा की मूर्ति अपने आप में अति आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जैसे-जैसे दुनिया अशान्त होती जा रही है, पापाचार ,अत्याचार और अनाचार बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे लोगों का इस मंदिर की ओर आकर्षण बढ़ता जा रहा है। भक्ति मार्ग में ब्रह्मा द्वारा स्थापना ,विष्णु द्वारा पालना एवं शंकर द्वारा विनाश बताया गया है। वर्तमान समय विनाश का जो दौर आरंभ हुआ है इसकी जानकारी आश्रम के संस्थापक स्वामी आत्म प्रकाशानंद जी लगभग 40 वर्ष पूर्व स्थापना के समय ही कर दी थी। उन्होंने कहा था कि 2018 के बाद दुनिया की स्थिति तेजी से बदलेगी, विनाश की प्रक्रिया तेज होगी और यही हुआ । 2020 में कोरोना का भयानक प्रकोप हुआ और फिर दिन प्रतिदिन विश्व अशात होता जा रहा है, प्राकृतिक विपदा,घर घर मे महाभारत,तनाव, पागलपन और लाइलाज बीमारियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। ऐसी स्थिति में आश्रम में स्थापित ब्रह्मा की मूर्ति की ओर लोगों का ध्यान तेजी से आकृष्ट हो रहा है।मूर्तियो के दर्शन के लिए काफी लोग आते हैं और पूजा पाठ विधि विधान से करते हैं ।यद्यपि मंदिर की मूर्तिययो पर चढ़ावा एवं पूजा पाठ की मनाही है लेकिन श्रद्धा वश भगत जो आते हैं वे लोग कुछ ना कुछ चढ़ावा चढ़ा ही जाते हैं। वे पूजा कर मन्नत भी मागते हैं ।मंदिर के निचले पक्ष में मनोकामना मंदिर है जिसकी मूर्ति के पास खड़े होकर सभी लोग अपने मन की मुराद मांगते है।आश्रम मुख्य रूप से योग आधारित है ।यहा योग का प्रयोग संस्थापक स्वामी आत्म प्रकाशानंद जी के निर्देश मे होता है।
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