बलिया : आल इंडिया फेडरेशन आफ यूनिवर्सिटी कालेज टीचर आर्गनाइज़ेशन(एआईफुक्टो) के आह्वान पर एवं फेडरेशन आफ उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी कालेज टीचर एसोसिएशन (फुपुक्टा) के निर्देश पर जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालयीय शिक्षक एसोसिएशन (जनकुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ अखिलेश कुमार राय एवं महामंत्री डॉ अवनीश चन्द पाण्डेय ने जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के सभी महाविद्यालयीय शिक्षक साथियों एवं कर्मचारियों से केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार की शिक्षक एवं शिक्षा विरोधी नीतियों के विरुद्ध अपने अपने महाविद्यालय पर यूनिट के पदाधिकारियों व शिक्षक साथियों से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की। अपील मात्र से क्षुब्ध एवं पीड़ित शिक्षक आज कार्य बहिष्कार करते हुए अपने अपने महाविद्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन के तो वैसे दो दर्जन से अधिक कारण हैं किन्तु शिक्षकों एवं कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगे बेहद गंभीर और उनके अंधकार मय भविष्य से जुड़ी हुई है। पहला मुद्दा पुरानी पेंशन योजना से जुडा़ हुआ है जो 2005 से नियुक्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नहीं मिल रही है। उनके लिए नई पेंशन योजना (एनपीएस) आई थी जिसमें 10 प्रतिशत शिक्षक या कर्मचारी तथा 14 प्रतिशत सरकार का अंशदान निर्धारित किया गया था। किन्तु न तो कर्मचारियों व शिक्षकों का अंशदान लिया गया और नहीं सरकार अपना अंशदान शिक्षकों व कर्मचारियों के एनपीएस अकाउंट में जमा करने का कोई प्रावधान की। अब 2005 के बाद नियुक्त शिक्षक व कर्मचारी सेवा निवृत्त हो रहे हैं जिन्हें 1000 रूपये से लेकर 5000 रूपये तक पेंशन मिल रही है और कटौती की राशि और सरकारी अंशदान कम होने से सम्पूर्ण जमा राशि का 60 प्रतिशत बेहद कम होने से जीपीएफ के समतुल्य मिलने वाली राशि भी नगण्य है और ऐसे सेवा निवृत्त शिक्षक व कर्मचारियों की दशा बेहद दयनीय है। शिक्षकों व कर्मचारियों के राष्ट्रव्यापी विरोध के फलस्वरूप मोदी सरकार ने एनपीएस के स्थान पर यूनीफाइड पेंशन योजना लेकर आई जो एनपीएस से भी खतरनाक है। यूपीएस में शिक्षक या कर्मचारी का अंशदान 10 प्रतिशत है और सरकार का अंशदान 18.5 प्रतिशत होगा। यह 25 वर्ष की सेवा के उपरांत अंतिम वर्ष के औसत वेतन का 50 प्रतिशत गारंटीकृत पेंशन योजना दर्शायी जा रही है। किन्तु एनपीएस में कर्मचारी एवं सरकारी अंशदान के बाजारू भाव से निर्धारित कुल राशि का 60 प्रतिशत जहाँ सेवानिवृत्ति के समय मिलने की आशा थी, यूपीएस उसपर पानी फेर देता है और और जीपीएफ के समतुल्य मिलने वाली एकमुश्त 60 प्रतिशत धनराशि को सरकार द्वारा पूरा का पूरा हड़प लेने की योजना के रूप में शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए यूनीफाइड पेंशन योजना (यूपीएस) आती है। एनपीएस जहाँ पेंशन हड़प योजना थी वहीं यूपीएस जीपीएफ हड़प योजना है। यूपीएस पेंशन योजना बैंक के कर्मचारियों को नहीं मिलेगी। यूपीएस पेंशन योजना पीएसयूज के कर्मचारियों को नहीं मिलेगी। 20 वर्ष सेवा करने वाले सेना के जवानों को नहीं मिलेगी क्योंकि यह 60 वर्ष के बाद ही मिलेगी और वे 40 से 45 और अधिकतम 50 वर्ष पर अधिकांश सेवा निवृत्त हो जाते हैं। यह अग्निवीरों को नहीं मिलेगी क्यों वे तीन वर्ष ही नौकरी करेंगे। यह 25 वर्ष सेवा करने वाले को भी 60 वर्ष के बाद ही मिलेगी। यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी 60 वर्ष के पूर्व मरता है तो भी यूपीएस पेंशन 60 वर्ष के बाद ही मिलेगी। यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी की सेवा 25 वर्ष नहीं है तो उसकी पेंशन 10000/ रूपये निर्धारित होगी और यदि वह मरता है तो उसके आश्रित पत्नी को उसका 60 प्रतिशत अर्थात 6000/ रूपये पेंशन निर्धारित होगी। सवाल ये है कि कितने लोगों अंतिम वर्ष के औसत वेतन के 50 प्रतिशत पेंशन प्रदान करेगी। कहीं एनपीएस में पेंशन डकार जाने के बाद यूपीएस में 50 प्रतिशत पेंशन के छद्म दिलासे के आवरण में जीपीएफ के समतुल्य मिलने वाली एकमुश्त राशि को डकार जाने की योजना के रूप में तो यूनीफाइड पेंशन योजना नहीं लाई गई है? ऐसी स्थिति में आए दिन बेरोजगार बच्चों एवं अविवाहित बच्चियों की शादी और अपने और अपनी पत्नी के अंधकारमय भविष्य को लेकर चिंतित शिक्षक एवं कर्मचारी हर्ट अटैक व पैरेलाइसिस के शिकार हो रहे हैं जिनकी कारूणिक दशा पर बाज भी दो बूंद आंसू गिरादे। किन्तु मोदी जी और भाजपा की सरकार अपनी असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा पार कर रही है। सरकार को यह भूलना नहीं चाहिए कि संगठन चींटी की भांति कार्य करता है। वह शिक्षकों व कर्मचारियों के संगठन को कमतर आंक रही हैं। लेकिन चींटी हाथी जैसे विशाल जानवर के सूंड में घुस जाए तो वह धराशायी हो जाता है। और संगठन सरकार के सूड़ में घुस चुका है और सरकार धराशायी हुई है और इसलिए वह सांप बनकर हमारे भविष्य को डसने का प्रयास कर रही है। रोज नए नए हथकंडे अपनाकर हमारे भविष्य पर चोट कर रही है। लेकिन संगठन चींटी है और सांप को समाप्त करना उसे आता है। लोककल्याणकारी राज्य की सरकार को लोकविध्वंसकारी कदम उठाने का कोई अधिकार नहीं है।
बड़े दुर्भाग्य की बात है कि ‘वन नेशन वन कांस्टीट्यूशन” की बात करने वाली सरकार, “वन नेशन वन सिटीजनशिप” की बात करने वाली सरकार और “वन नेशन वन इलेक्शन “की बात करने वाली सरकार “वन नेशन वन पेंशन के बजाय वन नेशन फोर पेंशन की जिद पर अडी़ हुई है। एक नेता दो या दो से अधिक पुरानी पेंशन योजना, एक शिक्षक या कर्मचारी और एक पुरानी पेंशन योजना, तीसरी नई पेंशन योजना और चौथा यूनीफाइड पेंशन योजना। क्या यह वन नेशन वन कांस्टीट्यूशन का विधान है? क्या यह देश के नागरिकों को यूनीफॉर्म सिटीजनशिप या समान नागरिक संहिता की अनुभूति कराता है? और यदि नहीं तो सरकार को अपने पेंशन एवं जीपीएफ हड़प योजना पर पुनर्विचार करना चाहिए और ओपीएस को पुनर्बहाल करने की घोषणा करनी चाहिए।
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर है जो विगत की सरकारें प्रत्येक 10 वर्ष पर गठित करती रही हैं। मोदीजी की सरकार सांसदों के वेतन , भत्ता और पेंशन को प्रत्येक 5 वर्ष पर बढाने का कानून तो पास कर लेती है किन्तु उसके मंत्री बार बार संसद में आधिकारिक बयान देते हैं कि आठवें वेतन आयोग के गठन सम्बंधित कोई विचार नहीं है। आखिर क्यों? क्या देश के कर्मचारियों व शिक्षकों के लिए मंहगाई का इंडेक्स अलग है? तीसरी मांग उत्तर प्रदेश सरकार से है कि उत्तरप्रदेश की परिधि के चारों ओर यूजीसी आच्छादित शिक्षण संस्थानों, कालेजों व विश्वविद्यालयों में 65 वर्ष की सेवा का प्रावधान है किन्तु उत्तरप्रदेश में क्यों नहीं है? इन्हीं जैसी अनेकानेक मांगों की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आज हम सभी महाविद्यालयों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे ताकि असंवेदनशील सरकार की संवेदना जागृत हो और शिक्षकों एवं कर्मचारियों के समस्याओं के समाधान हेतु सरकार ठोस कदम उठाने को मजबूर हो। अवसर पर सुदिष्ट बाबा पी जी कालेज, सुदिष्टिपुरी, बैरिया, बलिया, अमरनाथ मिश्र पी जी कालेज, दुबे छपरा, बलिया, कमला देवी बाजौरिया महाविद्यालय, दुबहड़ ,बलिया, सतीश चन्द्र कालेज, बलिया, श्री मुरली मनोहर टाउन पी जी कालेज, बलिया, कुंअर सिंह पी जी कालेज, बलिया, गुलाब देवी पी जी कालेज, बलिया, मथुरा पी जी कालेज, रसड़ा,बलिया, बजरंग पी जी कालेज, दादर, सिकन्दरपुर, बलिया एवं देवेंद्र पी जी कालेज, बेल्थरा रोड बलिया के सैकड़ों शिक्षक काली पट्टी बाँध कर प्रदर्शन किये जिसमें डॉ विवेकानंद पाण्डेय, डॉ रामचंद्र, डॉ विवेक राय ड, डॉ संजय मिश्र, डॉ श्याम बिहारी श्रीवास्तव, डॉ उमेश यादव, डॉ शिवेश राय, डॉ विवेक मिश्रा, डॉ अभिषेक अर्ष, डॉ अनिल तिवारी, डॉ राजेश कुमार, डॉ अशोक सिंह यादव, डॉ शिवप्रसाद, डॉ सीमा वर्मा डॉ संजय कुमार, डॉ कौशिक, डॉ आशुतोष यादव, डॉ मनीष पाण्डेय, डॉ अंगद सिंह, डॉ दशरथ चौहान, डॉ अजय पाण्डेय,डॉ राम तीरथ, डॉ मनोहर यादव, डॉ वृजेश सिंह संस्थापक अध्यक्ष जनकुआक्टा, डॉ सूबेदार प्रसाद, डॉ बृजेश सिंह, डॉ जितेंद्र वर्मा, डॉ संतोष गुप्ता,डॉ विनीत नरायण दुबे, डॉ विजयादशमी पाठक,डॉ फूल बदन सिंह, डॉ सच्चिदानंद, डॉ विमल, डॉ विनीत कुमार राय,डॉ सुबोध कांत तिवारी, डॉ राहुल देव, डॉ त्रिपुरारी ठाकुर , डॉ सच्चिदानंद मिश्र , डॉ चन्द्रप्रकाश यादव, डॉ अवनीश सोनकर, डॉ आशुतोष मिश्र, डॉ समर जीत सिंह, डॉ चौरसिया, डॉ बब्बन राम डाॅ सुरेश मिश्र डाॅ सुशील दुबे आदि शिक्षक मौजूद रहे।
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