- यूपी, बिहार, बंगाल से लेकर छत्तीसगढ़ तक भेजा जा रहा है झारखंड का अवैध बालू
- रांची खूंटी लोहरदगा लातेहार गढ़वा पलामू और हजारीबाग आदि जिलों में बालू तस्करों का सिंडिकेट हावी है नेता से लेकर पुलिस-प्रशासन सब मैनेज है
रांची : झारखंड में 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक है। इसके बावजूद धड़ल्ले से बालू का काला कारोबार
चल रहा है। रोजाना नदियों का सीना चीरकर 10000 ट्रैक्टर से ज्यादा बालू निकाला जा रहा है। तस्करों के गुर्गों का साफ साफ कहना है कि एडवांस पेमेंट करो यूपी-बिहार, बंगाल जहां बोलोगे, बालू भेज देंगे। मंत्रालय तक अपने ही लोग बैठे हैं। थाने से लेकर डीसी-एसपी सब सेट हैं। माल भेजने में कोई दिक्कत नहीं है।
एनजीटी की रोक के बाद भी नदियों में पोकलेन लगाकर बालू का खनन किया जा रहा है। दर्जनों ट्रैक्टर अवैध बालू लेकर एक साथ निकलते है लेकिन कोई रोकने-टोकने वाला नहीं था। दरअसल रांची, खूंटी, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा, पलामू, और हजारीबाग आदि जिलों में बालू तस्करों का सिंडिकेट इस कदर हावी है कि नेता से लेकर पुलिस-प्रशासन सब मैनेज है।
खास बात यह है कि झारखंड की नदियों से बालू निकाला जा रहा है, लेकिन राज्य में ही बालू की जबरदस्त किल्लत है। क्योंकि तस्कर यहां का बालू यूपी, बिहार, बंगाल से लेकर छत्तीसगढ़ में बेच रहे हैं। झारखंड में चोरी-छिपे बालू बेचने पर प्रति हाइवा 50 हजार रुपए मिल रहे हैं।
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