अशोक वर्मा
मोतिहारी : लोकसभा चुनाव के ठीक पहले दिल्ली देश के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय-छात्रसंघ के चुनाव में लाल लहर का फैलना देश के लिए परिवर्तन का नया आगाज है ।
भाकपा माले का छात्रसंगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा)के छात्र नेता व गया निवासी धनंजय अध्यक्ष पद-सहित उपाध्यक्ष, महासचिव, के अलांवा सहसचिव पद पर -वामपंथी पैनल की जीत तथा भाजपा पैनल विद्यार्थी परिषद की करारी हार देश मे बदलाव का सूचक है।इस जीत से संविधान बचाने की लड़ाई में नयी ऊर्जा मिलेगी।भाकपा माले इस जीत को तानाशाह और क्षद्म हिंदू मानसिकता के खिलाफ की जीत मानती है ।
जेएनयू के पूर्व महासचिव संदीप सौरभ जो बिहार में पालीगंज से भाकपा माले के विधायक हैं,
छात्र नौजवानो और शिक्षक/
शिक्षिकाओं के जीवन की हर मांग के साथ विधानसभा से लेकर सड़को पर अगली पंक्ति में रहते हैं ,ने कहा कि देश की जनता अब अलगाववादियों और हिटलरशाही से उब गई है।
भाकपा माले के प्रदेश नेता
प्रभुदेव यादव ने जेएनयू की जीत को लोकतंत्र की जीत कहा। भाकपामाले के प्रदेश नेता विष्णु देव यादव, भैरायल सिंह, अच्युतानंद पटेल, अशोक कुशवाहा ,भाग्य नारायण चौधरी आदि ने जेएनयू छात्र संघ के सभी पद पर वामपंथी विचारधारा की जीत को देश के लिए सुखद कहा तथा यह भी कहा कि जो लोग यह समझते थे कि देश में वामपंथी का लाल झंडा उखड़ गया उनके लिए एक संदेश आया कि राजधानी से लाल झंडे की जीत का प्रभाव पूरे देश में पड़ेगा ।आगामी लोकसभा चुनाव के परिणाम पर भी इसका असर होगा तथा 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में लाल झंडे का परचम पूरी तरह से लहराएगा।
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